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Home झारखण्ड पलामू 105 गांव के खेतों को पानी देने वाले मलय डैम का लेबल जीरो

105 गांव के खेतों को पानी देने वाले मलय डैम का लेबल जीरो

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105 गांव के खेतों को पानी देने वाले मलय डैम का लेबल जीरो

सतबरवा. सतबरवा प्रखंड के मुरमा कठौतिया स्थित मलय डैम सतबरवा, मेदिनीनगर तथा लेस्लीगंज प्रखंड क्षेत्र (आंशिक) के लिए लाइफ-लाइन माना जाता है. इस डैम के पानी से ही करीब 105 गांव के किसानों के खेतों में हरियाली तथा घरों में खुशहाली आती है. लेकिन जुलाई माह के अंतिम पखवाड़े में भी मानसून की बेरुखी के कारण डैम में पानी जीरो लेवल पर बना हुआ है. जिसके कारण लाभुक क्षेत्र के लोगों की बेचैनी बढ़ती जा रही है. उनके चेहरे पर मायूसी छायी है. हालांकि पहली बारिश के साथ ही अधिकतर किसान धान का बिचड़ा डाल चुके हैं. लेकिन बारिश के अभाव में धान रोपनी का कार्य प्रभावित हो रहा है. पिछले वर्ष सूखे की मार झेल चुके किसानों को कुछ समझ में नहीं आ रहा है. उनका कहना है बीते वर्ष पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण काफी नुकसान उठाना पड़ा था. इस वर्ष भी धान का बिचड़ा डाल चुके हैं, लेकिन बीते एक सप्ताह से वारिश नहीं हुई है. डैम में पानी भी काफी कम है.

डैम की जल क्षमता 43.09 फीट :

मलय डैम से सतबरवा प्रखंड के 27, मेदिनीनगर सदर प्रखंड पूर्वी क्षेत्र के 42 तथा लेस्लीगंज प्रखंड क्षेत्र के 36 गांव के किसानों को पक्की नहर के माध्यम से सिंचाई के लिए पानी पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है. फिलहाल डैम का पानी जीरो लेवल पर है. जबकि मलय डैम की क्षमता 43.09 फीट है. इसके बाद स्वत: पानी स्पील-वे (पानी निकास द्वार) से बाहर आना शुरू हो जाता है. लॉकडाउन के दौरान करीब 10 वर्षों के अंतराल पर डैम में नौका विहार के लिए सैलानियों की भीड़ उमड़ पड़ी थी. डैम को लेकर पर्यटन के क्षेत्र में लगातार कार्य किये जा रहे हैं. लेकिन पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण सैलानियों को भी निराशा हाथ लग रही है.

मलय डैम से सुकरी नदी को जोड़ने की मांग :

मलय डैम का निर्माण हुए लगभग चार दशक बीत चुके हैं. डैम के ऊपरी हिस्से में लातेहार जिले के मनिका प्रखंड में बहने वाली सुकरी नदी को जोड़ने की मांग वर्षों से किसान लगातार कर रहे हैं. लेकिन सरकार तथा प्रशासन के लोग चुप्पी साधे हुए हैं. जिसका खामियाजा लाभुक क्षेत्र के किसानों को भुगतना पड़ रहा है. किसानों का कहना है कि अगर सुकरी नदी को मलय डैम से जोड़ दिया जाये, तो पटवन के लिए पानी की समस्या नहीं झेलनी पड़ेगी. साथ ही खरीफ, रवि तथा अन्य फसलें भी पैदा कर सकते हैं. किसानों ने कहा कि उनका दर्द समझने वाला कोई नहीं है. सरकार और प्रशासन तो पहल करने की जरूरत है. पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने सुकरी नदी को मलय डैम से जोड़ने का मामला जोर-शोर से उठाया था तथा सिंचाई विभाग की टीम ने सर्वे भी कार्य किया था. मगर उनका कार्यकाल खत्म होते ही विभाग के लोगों ने योजना को ठंडे बक्से में डाल दिया. जिस कारण योजना धरातल पर नहीं उतर सकी. वर्तमान विधायक आलोक कुमार चौरसिया ने भी विधानसभा में मामला उठाया था. जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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