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Home झारखण्ड पलामू इंजीनियर साहब! महीने भर में ही दरक गया उत्तर कोयल नहर का पुल? अभी बनना तो बाकी है

इंजीनियर साहब! महीने भर में ही दरक गया उत्तर कोयल नहर का पुल? अभी बनना तो बाकी है

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इंजीनियर साहब! महीने भर में ही दरक गया उत्तर कोयल नहर का पुल? अभी बनना तो बाकी है
उत्तर कोयल मेन नहर पर बन रहे पुल में दरार दिखाता व्यक्ति. फोटो: प्रभात खबर

हुसैनाबाद से सैयद नौशाद अहमद की रिपोर्ट

North Koel Canal: पलामू जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बन रही उत्तर कोयल जलाशय परियोजना एक बार फिर निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है. हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के दरुआ बेनी पंचायत के समीप मुख्य नहर (आरडी 84.846) पर निर्माणाधीन पुल सह सुपर पैसेज में निर्माण के महज एक महीने के भीतर दरारें दिखाई देने का दावा किया गया है. इसे लेकर ग्रामीणों और किसानों में भारी नाराजगी है. स्थानीय लोगों ने पुल में दरार होने का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए भारत सरकार और झारखंड सरकार के मंत्रियों के साथ-साथ पलामू के जनप्रतिनिधियों से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है.

निर्माण कार्य में लापरवाही का लगाया आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि पुल निर्माण के दौरान तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया. उनका कहना है कि निर्माण के समय सेटरिंग के नीचे मिट्टी भरकर ढलाई का काम किया गया था. बाद में जब उस मिट्टी को हटाया गया तो कुछ ही घंटों के भीतर पुल के ढांचे में दरारें दिखाई देने लगीं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी ने तकनीकी खामियों को दूर करने के बजाय दरारों पर केवल लीपापोती कर मामले को दबाने की कोशिश की. उनका कहना है कि यदि शुरुआती चरण में ही पुल की यह स्थिति है तो भविष्य में इसके सुरक्षित रहने पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.

स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग

ग्रामीणों और किसानों ने मांग की है कि किसी स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से पुल की गुणवत्ता की जांच कराई जाए. उनका कहना है कि जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ है या नहीं. बसपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व प्रत्याशी शेर अली, किसान भुनेश्वर सिंह, पूर्व जिला परिषद प्रत्याशी मिथिलेश कुमार सिंह तथा दरुआ पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि योगेंद्र सिंह ने कहा कि उत्तर कोयल जलाशय परियोजना इस क्षेत्र के किसानों के लिए जीवनरेखा साबित होने वाली परियोजना है. यदि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता किया गया तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है. उन्होंने दोषी अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की.

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

पुल में कथित दरार का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है. ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बन रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना में यदि शुरुआत से ही गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है. उनका मानना है कि समय रहते खामियों को दूर नहीं किया गया तो परियोजना की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है.

विभाग ने नहीं की दरार की पुष्टि

हालांकि, पुल में दरार और घटिया निर्माण के लगाए जा रहे आरोपों की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. संबंधित विभाग की ओर से इस मामले में कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है. विभाग ने न तो पुल में दरार होने की पुष्टि की है और न ही आरोपों का खंडन किया है. ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.

1972 में शुरू हुई थी उत्तर कोयल जलाशय परियोजना

उत्तर कोयल जलाशय परियोजना की शुरुआत वर्ष 1972 में तत्कालीन बिहार सरकार ने की थी. उस समय बांध निर्माण के साथ अन्य सहायक कार्य भी शुरू किए गए थे. परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 1993-94 तक चलता रहा. वर्ष 2000 में बिहार के विभाजन के बाद परियोजना का बड़ा हिस्सा झारखंड के हिस्से में आ गया. बांध और बैराज का मुख्य क्षेत्र झारखंड में स्थित है. मोहम्मदगंज बैराज से निकलने वाली 11.89 किलोमीटर लंबी बाईं मुख्य नहर (एलएमसी) भी झारखंड में है. वहीं, दाहिनी मुख्य नहर (आरएमसी) की कुल लंबाई 110.44 किलोमीटर है, जिसमें से शुरुआती 31.40 किलोमीटर झारखंड में तथा शेष 79.04 किलोमीटर बिहार में पड़ता है. यह परियोजना पलामू और आसपास के इलाकों में सिंचाई सुविधा बढ़ाने और किसानों की कृषि व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है.

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किसानों की उम्मीदों से जुड़ी है परियोजना

उत्तर कोयल जलाशय परियोजना को पलामू प्रमंडल के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसके पूरा होने से हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है. ऐसे में निर्माणाधीन पुल में दरार के दावों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि अभी से गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक सुधार नहीं किए गए, तो भविष्य में परियोजना की उपयोगिता और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकती हैं. इसलिए उन्होंने सरकार से पूरे मामले की पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग दोहराई है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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