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छतरपुर सोन जलापूर्ति परियोजना छह साल बाद अधूरी

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छतरपुर सोन जलापूर्ति परियोजना छह साल बाद अधूरी

प्रतिनिधि, छतरपुर. अनुमंडल की बहुप्रतीक्षित 417 करोड़ रुपये की सोन जलापूर्ति परियोजना छह साल बीतने के बावजूद अब तक अधूरी है. बुधवार को जल जीवन मिशन की सेंट्रल टीम ने परियोजना की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए स्थलीय निरीक्षण किया. टीम का नेतृत्व नोडल पदाधिकारी करमजीत कौर ने की. उनके साथ पलामू उपायुक्त समीरा एस, पेयजल व स्वच्छता विभाग के पदाधिकारी भी शामिल थे. टीम ने सबसे पहले जपला के पास सोन नदी स्थल पर पहुंचकर निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया. भ्रमण कर देखी जमीनी हकीकत इसके बाद टीम ने पीपरा प्रखंड के चपरवार और छतरपुर प्रखंड के बाचकोमा, विषयपुर, सिलदाग खुर्द, खेंद्रा कला और गोठा गांव का दौरा कर वहां पेयजल आपूर्ति की स्थिति और योजना की प्रगति की समीक्षा की. नोडल पदाधिकारी करमजीत कौर ने कहा कि भविष्य में इस योजना का दायरा बढ़ाया जायेगा और नौडीहा बाजार, पीपरा व अन्य क्षेत्रों के आम नागरिकों को भी इसका लाभ मिलेगा. उन्होंने सिलदाग पंचायत में पानी की किल्लत को गंभीरता से लेते हुए कहा कि इस पंचायत को भी योजना से जोड़ा जायेगा. छह साल में सिर्फ 17 प्रतिशत कार्य यह महत्वाकांक्षी परियोजना जनवरी 2019 में शुरू की गयी थी और इसे 24 माह में पूरा करना था. निर्माण कार्य की जिम्मेदारी तमिलनाडु की आरपीपी इंफ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड को दी गयी थी. परंतु छह साल बाद भी योजना धरातल पर नहीं उतर सकी. अब तक मात्र 17 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो सका है, जिससे छतरपुर, नौडीहा बाजार, पीपरा और हरिहरगंज प्रखंड के 68,290 घरों को पेयजल आपूर्ति का सपना अधूरा है. केंद्र को भेजी जायेगी रिपोर्ट नोडल पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि परियोजना की वास्तविक रिपोर्ट तैयार कर केंद्र को भेजी जायेगी, जिससे आगे की रणनीति बनायी जा सके. स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस निरीक्षण के बाद परियोजना को गति मिलेगी और उन्हें जल्द ही शुद्ध पेयजल की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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