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श्रद्धालुओं के लिए अटूट आस्था का केंद्र है कंकाली आश्रम

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श्रद्धालुओं के लिए अटूट आस्था का केंद्र है कंकाली आश्रम

महेशपुर. प्रखंड मुख्यालय स्थित श्मशान घाट के पास अवस्थित कंकाली आश्रम में विगत 73 वर्षों से पौराणिक रीति रिवाज से मां दुर्गा की पूजा होती आ रही है. इस आश्रम की स्थापना वर्ष 1951 में पश्चिम बंगाल के दिनाजपुर जिले के जमींदार परिवार के राधेशचंद्र बनर्जी उर्फ सर्वानंद बाबा द्वारा की गयी थी. अपनी पुत्री के असामयिक निधन से शोकाकुल सर्वानंद बाबा ने गृहस्थ जीवन को त्याग दिया था. सर्वानंद बाबा शिक्षित होने के साथ-साथ एक अच्छे लेखक भी थे. उन्होंने बांग्ला व अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में रचना की थी. कंकाली आश्रम में दुर्गा पूजा सर्वप्रथम सर्वानंद बाबा ने 1951 में प्रारंभ कर 1959 तक की. उनके निधन के बाद भगवती प्रसाद सिंह और सर्वानंद बाबा के अन्य शिष्यों ने 1960 से 1999 तक पूजा की. वर्ष 2000 से अब तक भगवती प्रसाद सिंह के पुत्र जयशंकर सिंह उर्फ भैया ने अपने सहयोगी गोपाल भगत के साथ दुर्गा पूजा की जिम्मेवारी संभाल रखी है. यहां की पुरानी मान्यता के अनुसार मां दुर्गा की प्रतिमा को विसर्जन के पहले नगर भ्रमण नहीं कराया जाता है. प्रतिमा का विसर्जन मंदिर के पास बांसलोई नदी में किया जाता है. आज भी दुर्गा पूजा के समय कंकाली आश्रम में अष्टमी तथा नवमी के बीच होने वाली संधि पूजा के समय श्रद्धालुओं की काफी भीड़ जुटती है. मान्यता है कि संधि पूजा के वक्त मन से मांगी गयी मुराद अवश्य पूरी होती है. कंकाली आश्रम में दुर्गा पूजा की अष्टमी तिथि को कुंवारी कन्याओं को विशेष रूप से भोजन खिलाया जाता है.

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