प्रतिनिधि, महेशपुर. महेशपुर-शहरग्राम मुख्य सड़क पर क्रशरों व वाहनों के धूलकण से हवा में जहर घुल रहा है. शहरग्राम और रदीपुर में पत्थर कारोबारियों द्वारा चलाए जा रहे क्रशरों और खदानों से उत्पन्न धूल स्थानीय पर्यावरण पर गंभीर असर डाल रहा है. इन क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ चुका है कि स्वच्छ हवा देने वाले पेड़-पौधे धूल से इस कदर लदे हुए हैं कि वे खुद ही दम तोड़ रहे हैं. महेशपुर से शहरग्राम और रदीपुर सुंदरपहाड़ी तक सड़कों पर इन क्रशरों से उड़ी धूल पेड़-पौधों को पूरी तरह से ढक लिया है. यह इन सड़कों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के गांवों में भी प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है. सड़क के किनारे लगे पेड़-पौधे पर मोटी धूल की चादर बिछ गया हैं, जिससे उनकी जिंदगी संकट में है. बारिश के बाद ही इन पेड़ों से धूल की परत हटती है. इन खदानों और क्रशरों में पानी का छिड़काव नहीं किया जाता और न ही सड़क किनारे नये पेड़-पौधे लगाए जाते हैं, जो हवा को स्वच्छ करने में मदद कर सकता है. स्थानीय लोग और पर्यावरण विशेषज्ञ चिंतित हैं कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में यह क्षेत्र पूरी तरह से प्रदूषण से भर जायेगा, जिससे ना केवल वनस्पति, बल्कि स्थानीय लोगों का स्वास्थ्य भी प्रभावित होगा. पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों की कमी इस क्षेत्र में साफ देखी जा रही है. वही ग्रामीण व पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि इस स्थिति को सुधारने की सख्त जरूरत है, ताकि पर्यावरण और स्थानीय वनस्पति को बचाया जा सके. हम और हमारा समाज स्वास्थ्य रह सकें.