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खुद के खर्च और श्रमदान से कर रहे ऐतिहासिक तालाब का जीर्णोद्धार

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खुद के खर्च और श्रमदान से कर रहे ऐतिहासिक तालाब का जीर्णोद्धार

लोहरदगा . जिला मुख्यालय के निकटवर्ती चंदकोपा गांव के ग्रामीणों ने जल संरक्षण और आत्मनिर्भरता की एक अनूठी मिसाल पेश की है. सरकारी तंत्र की उदासीनता के आगे झुकने के बजाय यहां के लोगों ने सामूहिक रूप से श्रमदान और आपसी सहयोग से गांव के एक ऐतिहासिक और पुराने तालाब के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया है. ग्रामीणों के अनुसार, मंदिर के समीप स्थित यह पुराना तालाब लंबे समय से जर्जर स्थिति में था. पानी के इस महत्वपूर्ण स्रोत को बचाने के लिए ग्रामीणों ने कई बार जिला प्रशासन और भूमि संरक्षण विभाग से गुहार लगायी और आवेदन दिये, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई. सरकारी मदद की उम्मीद टूटने के बाद ग्रामीणों ने बैठक कर खुद के पैसे और श्रमदान से इसका जीर्णोद्धार व सौंदर्यीकरण करने का फैसला किया. फैसले के तुरंत बाद ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर फंड तैयार किया और काम शुरू कर दिया. अब रोजाना गांव के युवा और बुजुर्ग जेसीबी मशीन व ट्रैक्टर के साथ सुबह-सुबह तालाब पर इकट्ठा होकर श्रमदान कर रहे हैं. ग्रामीणों का संकल्प इस जलस्रोत को पूरी तरह पुनर्जीवित कर मंदिर परिसर को एक सुंदर स्थल के रूप में विकसित करना है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि आज तालाबों को नहीं बचाया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को जल संकट से जूझना पड़ेगा. चंदकोपा का यह प्रयास पूरे जिले के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है. इस मुहिम में गांव के अश्विनी साहू, प्रदीप साहू, सचिन कुमार, अनुराग कुमार, उज्जवल कुमार, अरविंद साहू, प्रवीण साहू, रूपेश साहू, बिपिन कुमार, सुमंत साहू, हेमंत साहू सहित समस्त ग्रामीण सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं.

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