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Home झारखण्ड लोहरदगा जीईएल चर्च की स्थापना 19 वीं सदी में जर्मनी से आये मिशनरियों ने की थी

जीईएल चर्च की स्थापना 19 वीं सदी में जर्मनी से आये मिशनरियों ने की थी

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जीईएल चर्च की स्थापना 19 वीं सदी में जर्मनी से आये मिशनरियों ने की थी

क्रिसमस को लेकर तैयारी जोरों पर, उत्साह चरम पर

गोपी कुंवर

लोहरदगा. जिले का ऐतिहासिक जीइएल (गोस्नर इवांजेलिकल लूथेरन) चर्च धार्मिक आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ सामाजिक और शैक्षणिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है. छोटानागपुर क्षेत्र में ईसाई धर्म के प्रसार के साथ जुड़ा यह चर्च वर्षों से सेवा, शिक्षा और भाईचारे का संदेश देता आ रहा है. इस चर्च की स्थापना 19वीं सदी में जर्मनी से आये मिशनरियों के प्रयासों से हुई थी. उनका उद्देश्य आदिवासी एवं ग्रामीण समाज को शिक्षा, स्वास्थ्य और नैतिक मूल्यों से जोड़ना था. लोहरदगा में जीइएल चर्च ने समय के साथ न केवल धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया, बल्कि समाज सुधार, शिक्षा और सामाजिक एकता के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया. आज भी यह चर्च जिले के मसीही समाज के लिए आस्था और प्रेरणा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

क्रिसमस पर्व को लेकर लोहरदगा में उत्साह का माहौल है. चर्च परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है. प्रभु यीशु मसीह के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में विशेष प्रार्थना सभा और धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारी अंतिम चरण में है. 24 दिसंबर की रात विशेष प्रार्थना सभा तथा 25 दिसंबर को सामूहिक आराधना और उत्सव कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे. चर्च प्रबंधन समिति एवं युवा संघ के सदस्य तैयारियों में जुटे हुए हैं. बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रभु यीशु के जीवन पर आधारित झांकियां तथा संदेशात्मक नाटकों की भी तैयारी की जा रही है.

मानवता, सेवा और एक-दूसरे के प्रति प्रेम का संदेश देता है क्रिसमस

क्रिसमस के अवसर पर प्रेम, शांति और भाईचारे का संदेश समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया गया है. मसीही समाज के सदस्यों का कहना है कि क्रिसमस केवल एक पर्व नहीं, बल्कि मानवता, सेवा और एक-दूसरे के प्रति प्रेम का संदेश देता है. लोहरदगा में हर वर्ष की तरह इस बार भी क्रिसमस को सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने की तैयारियां की जा रही हैं, जिसमें सभी समुदायों के लोगों की भागीदारी देखने को मिलती है.

लोहरदगा शहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीण इलाकों में भी क्रिसमस को लेकर उत्साह का माहौल है. चर्चों को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है. जगह-जगह क्रिसमस गैदरिंग का आयोजन हो रहा है. स्कूलों में भी क्रिसमस कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं. बाहर रहने वाले लोग भी इस बड़े पर्व में अपने घर लौट रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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