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शिलान्यास के दो साल बाद भी बाइपास का काम अधूरा

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शिलान्यास के दो साल बाद भी बाइपास का काम अधूरा

फोटो.बाइपास सडक का निर्माण कार्य का डीसी ने किया निरीक्षण, काम में तेजी लाने का दिया निदेश फोटो. बाइपास सडक़ का निरीक्षण करते डीसी गोपी कुंवर, लोहरदगा लोहरदगा जिले में बाइपास सड़क निर्माण कार्य लंबे समय से अधूरा पड़ा है. यह परियोजना जिलेवासियों की चिर प्रतीक्षित मांग रही है, क्योंकि शहर के बीच से प्रतिदिन सैकड़ों बाक्साइट ट्रक गुजरते हैं, जिससे यातायात दबाव और दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है. इस समस्या के समाधान के लिए एनएच 143ए अंतर्गत लगभग 19.9 किलोमीटर लंबी बाईपास सड़क का निर्माण प्रस्तावित किया गया था. इस बाईपास मार्ग की योजना हिरही से शुरू होकर निंगनी होते हुए अरु गांव तक जाती है. इसमें 10 किलोमीटर फोर लेन सड़क और शेष 9.9 किलोमीटर चौड़ी (10 मीटर) सड़क बनायी जानी है. कुल 17 गांवों से होकर यह मार्ग गुजरेगा, जिनमें लोहरदगा प्रखंड के बक्सी, बंजारकिस्को, गुडगांवा, हिरही, जोरी, कैमो और निंगनी शामिल हैं. वहीं सेन्हा प्रखंड के अरु, बंसरी, चंदकोपा और सेन्हा गांव तथा किस्को प्रखंड के अरेया, बगडू, बेठहट और पतरातू भी इस मार्ग से जुड़ेंगे. परियोजना की लागत लगभग 200 करोड़ रुपये है. इस परियोजना की लागत लगभग 200 करोड़ रुपये आंकी गयी है. निर्माण का ठेका रांची की कंपनी वीकेएस इन्फ्रा को दिया गया था, जिसने 25 अगस्त 2022 को एनएच रांची के साथ अनुबंध किया. लेकिन अनुबंध के बाद भी कार्य प्रारंभ नहीं हुआ, जिससे जनता में निराशा फैल गयी. शिलान्यास के दो साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद सड़क निर्माण अधूरा है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लोहरदगा उपायुक्त डॉ. कुमार ताराचंद ने स्वयं स्थल पर जाकर निरीक्षण किया. उन्होंने संबंधित एजेंसी के अभियंता और ठेकेदार को निर्देश दिया कि कार्य शीघ्र पूरा किया जाये और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाये. निरीक्षण के दौरान अपर समाहर्ता जितेन्द्र मुंडा, भूमि सुधार उप समाहर्ता सुजाता कुजूर, सदर अंचल अधिकारी आरएन खलखो तथा कार्यान्वयन एजेंसी के कर्मी उपस्थित थे. भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी लगभग पूरी हो चुकी है. अधिकांश प्रभावित परिवारों को मुआवजा राशि दी जा चुकी है. जिन मामलों में पारिवारिक विवाद है, उनकी राशि सरकारी खाते में जमा कर दी गयी है. विवाद सुलझने पर संबंधित परिवारों को भुगतान कर दिया जायेगा. उपायुक्त ने भू-अर्जन पदाधिकारी को भी आवश्यक निर्देश दिए हैं ताकि प्रक्रिया में तेजी लायी जा सके. बाईपास सड़क निर्माण पूरा होने पर लोहरदगा शहर को बड़ी राहत मिलेगी. प्रतिदिन गुजरने वाले भारी ट्रक अब शहर से बाहर निकलेंगे, जिससे दुर्घटनाओं में कमी आयेगी और यातायात सुगम होगाय साथ ही, शहर का पर्यावरण और जनजीवन भी बेहतर होगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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