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Home झारखण्ड लातेहार डाक सिर्फ बेसरा जंगल का, बीड़ी पत्ता तोड़ा जा रहा चार जंगल से

डाक सिर्फ बेसरा जंगल का, बीड़ी पत्ता तोड़ा जा रहा चार जंगल से

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डाक सिर्फ बेसरा जंगल का, बीड़ी पत्ता तोड़ा जा रहा चार जंगल से

बारियातू. इस वर्ष प्रखंड में अवैध केंदू पत्ता (बीड़ी पत्ता) का धंधा फल-फूल रहा है. अवैध रूप से बीड़ी पत्ता की तुड़ाई व खरीदारी जारी है. इससे सरकार को बड़े राजस्व का नुकसान हो रहा है. प्रखंड के वन क्षेत्र अंतर्गत नावाडीह, गड़गोमा, चुंबा, बिरबिर, रूचवा, बठेठ, करमा, डाढ़ा सहित अन्य जंगली इलाकों से अवैध रूप से बीड़ी पत्ता की तुड़ाई व खरीदारी जारी है. ज्ञात हो कि प्रखंड अंतर्गत वन्य क्षेत्र में बीड़ी पत्ता के मुख्य चार क्षेत्र है, जिसका डाक हर वर्ष लगाया जाता है. इसमें वन क्षेत्र (275), झीरमतकोमा (281), गड़गोमा (282) व बेसरा (283) शामिल है. इस बार बेसरा-283 जंगल का ही डाक हुआ है. शेष अन्य तीन जंगल का डाक नहीं हुआ. ऐसे में बीड़ी पत्ता का अवैध करनेवालों की चांदी हो गयी है. प्रतिबंधित क्षेत्र से भी बीड़ी पत्ता की तुड़ाई व खरीदारी की जा रही है. जंगली क्षेत्र में ही कई खलिहान बनाये गये हैं, जहां पत्तों की खरीदारी की जा रही है. वन्य प्राणी आश्रयणी क्षेत्र में लकड़ी सहित अन्य वनोत्पाद की कटाई-तुड़ाई पर पूरी तरह प्रतिबंध है. बावजूद स्थानीय व बाहरी ठेकेदार की मिलीभगत से बीड़ी पत्ते की तुड़ाई व खरीदारी की जा रही है. प्रखंड में हर वर्ष लाखों रुपये के बीड़ी पत्ते की अवैध तरीके से खरीदारी की जाती है. पिछले करीब 20 दिन से अवैध तरीके से बीड़ी पत्ता की खरीदारी की सिलसिला जारी है. सूत्रों की माने तो नक्सलियों की आड़ में अवैध बीड़ी पत्तों की खरीदारी का धंधा चलता है. वन विभाग द्वारा एक-दो प्राथमिकी दर्ज कर खानापूर्ति की जाती है.

मजदूरों का होता है शोषण

बीड़ी पत्ता तोड़ने से लेकर पोला बनाने के कार्य में लगे मजदूरों का शोषण हाे रहा है. कुछ मजदूर व मुंशी ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि प्रति सौ पोला सरकारी दर 175 रुपये है, पर हमें स्थानीय ठेकेदार प्रति सौ पोला 130 रुपये ही देता है. वहीं मुंशी को प्रति हजार पोला सौ रुपये देता है. कार्यस्थल पर शरबत, पानी आदि की व्यवस्था भी ठेकेदार को करती होती है, पर किसी जंगल में ऐसा नहीं हो रहा. गांव के महिला-पुरुष जंगलों से चिलचिलाती धूप में पत्ता तोड़ कर लाते हैं. एक-एक पत्ता सजाकर खलिहान में पोला बनाकर बेचते है. बावजूद उन्हें सही मजदूरी नहीं मिलती.

अधिकारी नहीं उठाते हैं फोन

रेंजर नंद कुमार मेहता लातेहार के अलावे चंदवा, बालूमाथ, बारियातू व हेरहंज वन क्षेत्र के प्रभार में है. कई बार उन्हें जानकारी देने व पूछने के लिये फोन किया जाता है, पर वे फोन ही नहीं उठाते. इस संबंध में भी श्री मेहता के नंबर (7250584495) पर फोन कर जानकारी लेने का प्रयास किया गया, पर उन्होंने फोन नहीं उठाया. उनके अधीनस्थ कर्मी भी अधिकारी का हवाला देकर कुछ भी बताने से इंकार करते हैं. इस संबंध में संवेदक को भी दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, पर उन्होंने ने भी फोन नहीं उठाया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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