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Home झारखण्ड कोडरमा आंगनबाड़ी सेविका सहायिका यूनियन ने मनाया काला दिवस

आंगनबाड़ी सेविका सहायिका यूनियन ने मनाया काला दिवस

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आंगनबाड़ी सेविका सहायिका यूनियन ने मनाया काला दिवस

कोडरमा. सीटू से संबद्ध ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ आंगनबाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर (आइफा) के देशव्यापी आह्वान पर आंगनबाड़ी में अनिवार्य फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (एफआरएस) के खिलाफ गुरुवार को ब्लॉक परिसर में राज्य आंगनबाड़ी सेविका सहायिका यूनियन के बैनरतले सेविका सहायिकाओं ने विरोध-प्रदर्शन कर काला दिवस मनाया. यहां एफआरएस वापस लो, सेविकाओं का उत्पीड़न बंद करो, मानदेय पोषाहार में कटौती नहीं चलेगी आदि नारे लगाये गये. प्रदेश अध्यक्ष मीरा देवी ने कहा कि देश की आंगनबाड़ी कर्मचारी इस बात से स्तब्ध हैं, कि 11 अगस्त को बाल विकास विभाग मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में आंगनबाड़ी केंद्रों में सभी सेवाओं के लिए अनिवार्य फेस रिकॉग्निशन सिस्टम जारी रखने का निर्णय दोहराया है, जबकि दिल्ली में छह अगस्त को आंगनबाड़ी फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल को महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने आश्वासन दिया था कि आंगनबाड़ी सेवाओं में अनिवार्य एफआरएस से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान होगा. सीटू के राज्य सचिव संजय पासवान ने कहा कि देश के सर्वाधिक गरीब और जरूरतमंद लोगों के पास मोबाइल फोन नहीं है. अनेक के आधार नंबर मोबाइल से लिंक नहीं हैं. एफआरएस में पंजीकरण नहीं होने से लाभार्थियों को आंगनबाड़ी सूची से हटाना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है. जिनके पास फोन हैं, वे अक्सर काम पर बाहर होते हैं. ओटीपी प्राप्त करना असंभव हो रहा है. सेविका सहायिकाओं को अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है. अब तक तीन राज्यों से सेविकाओं की मृत्यु हो चुकी है. डिजिटलाइजेशन का उद्देश्य आंगनबाड़ी कर्मचारियों के काम को कम करना था, लेकिन अब ई-केवाइसी, लाभार्थियों का चेहरा पहचान, डिजिटल शिक्षा और अब एफआरएस से सेविकाएं निरंतर तनाव में है. सीटू के जिला सचिव रमेश प्रजापति ने कहा कि टेक होम राशन वितरण और अन्य सेवाओं के लिए एफआरएस को अनिवार्य बनाये रखने से लाखों आंगनबाड़ी कर्मचारियों और लाभार्थियों के साथ अन्याय किया जा रहा है. अध्यक्षता मरकच्चो प्रखंड सचिव बेबी कुमारी ने की. कार्यक्रम में उर्मिला देवी, सरस्वती देवी, संध्या कुमारी, विमला कुमारी, सरिता सिन्हा, गीता देवी, उषा, बबीता, चिंता, सरिता (सहायिका), अनुराधा, देवंती, पिंकी कुमारी (पोषण सखी), फरजाना खातुन, शीला, तारा देवी (सहायिका), गिरजा, रेश्मा बानो सहित दर्जनों लोग शामिल थे.

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