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लोक अदालत का निर्णय अंतिम निर्णय होता है : प्रधान जिला जज

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लोक अदालत का निर्णय अंतिम निर्णय होता है : प्रधान जिला जज

कोडरमा. जिला विधिक सेवा प्राधिकार कोडरमा द्वारा व्यवहार न्यायालय परिसर में शनिवार को मासिक लोक अदालत का आयोजन किया गया़ मौके पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार बाल कृष्ण तिवारी ने कहा कि लोक अदालत की लोकप्रियता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है़ लोक अदालत में दिये गये फैसले में दोनों पक्षों की जीत होती है. कोई पक्ष इसे थोपा हुआ महसूस नहीं करता है़ लोक अदालत में दिये गये निर्णय के विरुद्ध कहीं भी कोई अपील नहीं होती है. लोक अदालत का निर्णय अंतिम निर्णय होता है़ उन्होंने कहा कि लोक अदालत शीघ्र, सस्ता और सुलभ न्याय प्रदान करने का सशक्त माध्यम है़ लोक अदालत में जहां एक ओर लोगों के समय और पैसे की बचत होती है़ वहीं दूसरी ओर न्यायालय से मुकदमों का बोझ कम होता है़ लोक अदालत में आठ बेंचों का गठन किया गया़ था बेंच संख्या एक में प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय अमितेश लाल व अधिवक्ता भुनेश्वर राणा, बेंच संख्या एक में जिला जज प्रथम गुलाम हैदर व अधिवक्ता संजय कुमार सिंह, बेंच संख्या तीन में जिला जज तृतीय राकेश चंद्रा व अधिवक्ता सुधीर कुमार सिन्हा, बेंच संख्या चार में एसीजेएम मनोरंजन कुमार व अधिवक्ता लखन प्रसाद सिंह, बेंच संख्या पांच में मुंसिफ मिथिलेश कुमार व अधिवक्ता सुरेश कुमार, बेंच संख्या छह में एसडीजेएम कंचन टोप्पो व अधिवक्ता संगीता रानी, बेंच संख्या सात में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी नमिता मिंज व अधिवक्ता सुमन जायसवाल तथा बेंच संख्या आठ में स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष डॉ आरके तिवारी व सदस्य ममता सिंह ने मामले की सुनवाई की़ आठ बेंचो के माध्यम से आठ मामलों का निष्पादन हुआ. इस अवसर पर जिला जज तृतीय राकेश चंद्रा, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव गौतम कुमार, न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी शिवांगी प्रिया, ज्योत्सना पाण्डेय, विद्युत विभाग, उत्पाद विभाग के अधिकारी, न्यायालयकर्मी रणजीत कुमार सिंह, मूंगा लाल दास, राजेंद्र कुमार, मनोज मिश्रा, रंजीत कुमार, राजीव रंजन, कुमार संजय, महेश्वर कुमार, राजीव कुमार, रवि कुमार, पीएलवी रवींद्र कुमार, पांडेय शेखर प्रसाद, मनोज कुमार, कंचन कपूर आदि मौजूद थे़

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