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Home झारखण्ड कोडरमा दलित टोला को उजाड़ने की साजिश के खिलाफ सड़क पर उतरे लोग, अंचल कार्यालय पर किया प्रदर्शन

दलित टोला को उजाड़ने की साजिश के खिलाफ सड़क पर उतरे लोग, अंचल कार्यालय पर किया प्रदर्शन

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दलित टोला को उजाड़ने की साजिश के खिलाफ सड़क पर उतरे लोग, अंचल कार्यालय पर किया प्रदर्शन
कोडरमा में प्रदर्शन करते सीटू के नेता. फोटो: प्रभात खबर

कोडरमा से विकास कुमार की रिपोर्ट

Koderma News: कोडरमा नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 19 स्थित इंदरवाटांड़ में वर्षों से बसे दलित परिवारों को हटाने की आशंका के खिलाफ मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन किया गया. झारखंड राज्य निर्माण कामगार यूनियन (सीटू) के बैनर तले बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतरे और अंचल कार्यालय पहुंचकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि दलित टोला को उजाड़ने की साजिश रची जा रही है. उन्होंने कहा कि वर्षों से बसे गरीब परिवारों को बिना पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था के हटाने की कोशिश की जा रही है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है.

वीर कुंवर सिंह पार्क से निकला जुलूस

प्रदर्शन से पहले वीर कुंवर सिंह पार्क से एक जुलूस निकाला गया. जुलूस ओवरब्रिज, झंडा चौक और ब्लॉक रोड होते हुए प्रखंड कार्यालय पहुंचा, जहां वह सभा में तब्दील हो गया. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने “सीओ होश में आओ”, “गरीबों को उजाड़ना बंद करो” और “भूमिहीन परिवारों को जमीन बंदोबस्त करो” जैसे नारे लगाए. प्रदर्शन में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए.

गरीबों को हटाने से पहले पुनर्वास जरूरी : संजय पासवान

सीटू के जिलाध्यक्ष प्रेम प्रकाश की अध्यक्षता में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए सीटू के राज्य सचिव संजय पासवान ने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में यदि गरीब लोग बसे हुए हैं तो उन्हें पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना हटाया नहीं जा सकता. उन्होंने कहा कि कानून के तहत पहले प्रभावित परिवारों को नोटिस देना और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर देना अनिवार्य है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक गरीबों को न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा. संजय पासवान ने कहा कि गरीब और दलित परिवार वर्षों से वहां रह रहे हैं और अपनी मेहनत की कमाई से घर बनाए हैं. ऐसे में अचानक उन्हें बेदखल करना अमानवीय कदम होगा.

दाखिल-खारिज को लेकर भी उठे सवाल

सभा को संबोधित करते हुए किसान सभा के राज्य अध्यक्ष असीम सरकार ने जमीन के दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जब उस जमीन पर पहले से लोग रह रहे हैं तो किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दाखिल-खारिज कैसे हो गया. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले पर अंचलाधिकारी को जवाब देना होगा. उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की.

तीन पीढ़ियों से रह रहे हैं लोग

निर्माण कामगार यूनियन के जिलाध्यक्ष प्रेम प्रकाश ने कहा कि इंदरवाटांड़ में रहने वाले अधिकांश लोग दिहाड़ी मजदूरी कर अपना जीवन चलाते हैं. वे पिछले तीन पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं और धीरे-धीरे पैसे जोड़कर अपने घर बनाए हैं. उन्होंने कहा कि एक झटके में लोगों को उजाड़ देना न केवल मानवता के खिलाफ है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का भी उल्लंघन है. वार्ड नंबर 19 के पार्षद प्रतिनिधि पिंटू कुमार यादव ने भी प्रदर्शन को समर्थन देते हुए कहा कि वे गरीबों और दलित परिवारों के हक की लड़ाई में हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे.

अंचलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

प्रदर्शन के बाद 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने अंचलाधिकारी से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा. प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि दलित परिवारों को किसी भी हाल में बेदखल नहीं किया जाए और भूमिहीन लोगों के लिए जमीन बंदोबस्ती की जाए. अंचलाधिकारी ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि मामले से उपायुक्त को अवगत कराया जाएगा और उचित कार्रवाई की जाएगी.

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बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद

प्रदर्शन में बसंती देवी, सहदेव दास, मो. मुश्ताक, धनेश्वरी देवी, शिवनंदन भुइयां, जागेश्वर भुइयां, छोटू भुइयां, पप्पू भुइयां, विनोद भुइयां, जमना भुइयां, पुतुल भुइयां, रामचंद्र भुइयां, सोफारी भुइयां, चंदवा देवी, टुकलाल भुइयां, सोनू भुइयां, समता देवी, मुंदरी देवी, गायत्री देवी, अन्नू देवी और सुरेश भुइयां समेत बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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