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पुराने वर्ष की विदाई व नववर्ष के स्वागत को लेकर उत्साह

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पुराने वर्ष की विदाई व नववर्ष के स्वागत को लेकर उत्साह

झुमरीतिलैया. वर्ष 2024 के समापन में अब केवल नौ दिन शेष हैं. ऐसे में पुराने वर्ष की विदाई और नववर्ष 2025 के स्वागत को लेकर लोगों में उत्साह दिख रहा है़ पर्यटक स्थलों के साथ ही पिकनिक स्पॉट व पार्क में लोगों की भीड़ लगनी शुरू हो गयी है़ रविवार को ब्लॉक रोड स्थित बाल उद्यान, लख्खीबागी स्थित महर्षि कदम ऋषि उद्यान और तिलैया डैम में विशेष चहल-पहल दिखी़ बाल उद्यान में बच्चे झूलों का आनंद लेते दिखे. वहीं महिलाएं धूप सेंकते नजर आयीं. कुछ लोग खेलकूद में व्यस्त थे. युवा गीत-संगीत व अंताक्षरी का आनंद लेते दिखाई दिये. बच्चों और बालिकाओं में सेल्फी लेने का जुनून भी दिखा़ जैसे-जैसे वर्ष 2024 का अंत नजदीक आ रहा है पिकनिक स्थलों पर लोगों का उत्साह बढ़ता जा रहा है़ बाल उद्यान के संचालक टोनी कुमार ने बताया कि 25 दिसंबर से एक जनवरी तक प्रवेश शुल्क में छूट दी जायेगी़ 31 दिसंबर को पार्क आधी रात 12:30 बजे तक खुला रहेगा और इस दौरान केक काटकर नववर्ष का स्वागत किया जायेगा. एक जनवरी को डीजे की धुन पर लोग झूमते नजर आयेंगे. खाने-पीने के स्टॉल लगाये जायेंगे़ इधर, सप्ताहांत और मंगलवार को बच्चों, शिक्षकों और व्यवसायियों की बड़ी संख्या पार्कों और पर्यटक स्थलों का रुख कर रही है़ जब साल के आखिरी दिन का कैलेंडर बदलेगा तो हैप्पी न्यू ईयर की गूंज हर ओर सुनाई देगी़ इस दिन कई संस्थाएं नृत्य-संगीत के कार्यक्रम भी आयोजित करेंगी़ तिलैया डैम पर नौका विहार की सुविधा उपलब्ध है और 25 दिसंबर से एक जनवरी तक यहां भारी भीड़ जुटने की संभावना है़ वहीं कोडरमा जिले के गझंडी स्थित वृंदाहा जलप्रपात, सतगावां का पेट्रो जलप्रपात, मरकच्चो का चंचलिनी धाम, ध्वजाधारी धाम और झरनाकुंड में भी सैलानियों का जमावड़ा शुरू हो चुका है़

क्षेत्रवासियों को जिला स्तरीय नृत्य-संगीत कार्यक्रमों की कमी का मलाल

झुमरीतिलैया और कोडरमा बाजार में हर वर्ष 31 दिसंबर को स्वर संगम और युवा संगीत समूह की ओर से छात्रों और कलाकारों के लिए नृत्य-संगीत का कार्यक्रम आयोजित होता था, लेकिन पिछले पांच वर्षों से यह कार्यक्रम बंद है़ इस कारण स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच नहीं मिल पा रहा है़ क्षेत्रवासियों का मानना है कि जिला प्रशासन और समाजसेवी संस्थाओं को इस दिशा में कदम उठाना चाहिए़ बच्चों और युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए मंच मिलना चाहिए, ताकि वे अपनी कला को निखार सकें.

कला को पहचान दिलाने के लिए सामूहिक प्रयास भी जरूरी

नववर्ष का स्वागत उमंग और उत्साह के साथ हो, यह हर किसी की चाहत है, लेकिन स्थानीय कलाकारों की कला को पहचान दिलाने के लिए सामूहिक प्रयास भी जरूरी है़ कोडरमा जिले में सांस्कृतिक गतिविधियों के स्तर और अनियमितता पर चिंता व्यक्त करते हुए जाने-माने गायक व शिक्षाविद् नवीन जैन पांड्या ने कला और संस्कृति को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया़ उन्होंने कहा कि जिले में लोक एवं शास्त्रीय संगीत और नृत्य को सिखाने के लिए प्रशिक्षकों और उचित प्रशिक्षण की व्यवस्था का घोर अभाव है़ नवीन पांड्या का कहना है कि जो भी कलाकार कोडरमा से उभरकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमा रहे हैं, वे अपनी व्यक्तिगत मेहनत और संघर्ष के बल पर ऐसा कर रहे हैं. जिला प्रशासन का ध्यान इस दिशा में नहीं है़ स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस जैसे आयोजनों में केवल औपचारिकता के लिए बच्चों और स्थानीय कलाकारों को मंच मिलता है, लेकिन कला को गंभीरता से प्रोत्साहित करने के प्रयास नदारद हैं

ध्वजाधारी महोत्सव के आयोजन का सुझाव

पांड्या ने सुझाव दिया कि कोडरमा में ध्वजाधारी महोत्सव जैसे भव्य आयोजन की शुरुआत होनी चाहिए, जिसमें देशभर के बड़े कलाकारों के साथ-साथ कोडरमा की स्थानीय प्रतिभाओं को भी मंच प्रदान किया जाये. राजगीर महोत्सव, इटखोरी महोत्सव और रजरप्पा महोत्सव की तर्ज़ पर ऐसा आयोजन कोडरमा को एक नयी पहचान देगा़ उन्होंने कहा कि यह तभी संभव होगा जब अनुभवी प्रशिक्षकों को बुलाकर ओरिएंटेशन और स्क्रीनिंग प्रोग्राम आयोजित किये जाये. साथ ही, नियमित कलात्मक कक्षाओं की शुरुआत हो, जिससे जिले की प्रतिभाओं को सही दिशा मिले़

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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