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घंघरी यज्ञ में शिवरात्रि व शिव की महिमा का बखान

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घंघरी यज्ञ में शिवरात्रि व शिव की महिमा का बखान

जयनगर. प्रखंड के ग्राम घंघरी में रामू पंडित, द्रोपदी देवी, रविंद्र देवी व संगीता देवी के द्वारा ग्रामीणों के सहयोग से आयोजित शिव पुराण महायज्ञ में बीती रात प्रवचन के दौरान मानस मंजरी सुश्री प्रियंका शास्त्री ने शिवरात्रि व शिव की महिमा पर प्रवचन देते हुए कहा कि शिव औघरदानी कल्याण के देवता माने गये हैं. सृष्टि निर्माण में एक ही शक्ति तीन रूपों में अपना काम करते हैं. ब्रहमा सृष्टि का निर्माण करते है, विष्णु पालन पोषण करते हैं और शिव संहार करते हैं. यानी निर्माण से नाश तक जगत का चक्र परम सत्ता द्वारा निरंतर प्रकृति में चलता रहता है. उन्होंने कहा कि वैदों में प्रकृति के उपदानों की उपासना की गयी है. हरेक उपदान को देवता का रूप दिया गया है. ऋग्वेद के रात्रि सूक्त में रात्रि को नृत्य, प्रलय व दिन को नृत्य सृष्टि कहा गया है. उन्होंने कहा कि दिन में हमारा मन और हमारी इंद्रियां भीतर से बाहर निकलकर प्रपंच की ओर दौडती है और रात्रि में बाहर से भीतर जाकर शिव की ओर प्रवृत हो जाती है. उन्होंने कहा कि वृषभ शिव का वाहन है, यह हमेशा शिव के साथ. वृषभ का अर्थ धर्म है, मनुस्मृति के अनुसार वेद ने धर्म को चार पैरों वाला प्राणी कहा है, उसके चार पैर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष है. उन्होंने कहा कि उनकी जटा आकाश स्वरूप है जो वायु मंडल की प्रतिक है. गंगा व चंद्रमा शांति का प्रतीक है, शिव का मन भोला निर्मल, पवित्र सशक्त है, उनका विवेक हमेशा जागृत रहता है. उन्हें त्रिलोचन कहते है, वेदानुसार सूर्य व चंद्र विराट पुरूष के नेत्र है, अग्नि शिव का तीसरा नेत्र है. शिव के हाथों में एक मारक शस्त्र त्रिशुल है, दूसरे हाथ में डमरू है. डमरू शब्द का नाद ही ब्रहमा रूप है. मौके पर यज्ञाचार्य राजकुमार शास्त्री सहित भारी संख्या में श्रद्धालु भक्त मौजूद थे.

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