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फसल की बेहतर देखभाल से होती है बेहतर उपज

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फसल की बेहतर देखभाल से होती है बेहतर उपज

जयनगर. जिन किसानों ने गेहूं का बीज बोया था, अब वो बीज पौधों का रूप लेने लगा है़ प्रखंड के सोनपुरा, चक, चुटियारो, चंद्रघटी, सिंगारडीह, चरकी पहरी, सतडीहा, योगियाटिल्हा, चेहाल, चंद्रपुर सहित बराकर नदी के किनारे किसानों ने गेहूं की खेती की है़ इस समय फसल को उचित देखभाल की जरूरत है, ताकि बेहतर उपज हो सके़ गेहूं की पौधों अभी बहुत छोटे हैं. ऐसे में उनमें कीट का प्रकोप बढ़ जाता है. इसी समय खरपतवार भी पनपते है़ कीट के प्रकोप से पौधे पीले पड़ने लगते है. कई बार सूखने भी लगते है़ं

कैसे करें फसल की देखभाल

कैसे करे गेहूं की फसल की देखरेख इस संबंध में जानकारी देते कृषि विज्ञान केंद्र जयनगर कोडरमा के एग्रोफोरेस्टी ऑफिसर रूपेश रंजन ने बताया कि गेहूं की फसल की सुरक्षा के लिए खरपतवार नियंत्रण जरूरी है. फसल के साथ कुछ घास भी उग आते हैं जिससे फसल का विकास बाधित हो जाता है़ खरपतवार कीड़े-मकौडे को आकर्षित करते है़ उन्होंने बताया कि अधिक उपज के लिए पोषण प्रबंधन जरूरी है़ उत्पादकता बढ़ाने के लिए फसल को मजबूत बनाये, मिट्टी और फसल के जरूरत के अनुसार पोषक तत्व व उर्वरक का छिड़काव करे. ऐसी स्थिति में 110 किलो यूरिया, 55 किलो डीएपी और 20 पोटाश का प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें. इसी बीच फसल में नाइट्रोजन की आधी मात्रा का इस्तेमाल करे़ इससे फसल को उचित पोषक तत्व मिलेगा़ श्री कुमार ने बताया कि समय पर सिंचाई नहीं होने से भी फसल का विकास बाधित हो सकता है़ फसल की कम-से कम छह बार सिंचाई करें. उन्होंने बताया कि पहली सिंचाई 20-25 दिन बाद, दूसरी 40-45 दिन बाद, तीसरी 60-65 दिन बाद, चौथी 80-85 दिन बाद, पांचवीं 90-105 दिन बाद और छठी सिंचाई 105-120 दिन बाद जरूर करेें उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम से फसल कीड़े-मकौड़े व बीमारियों की चपेट में आ सकते है़ कीट नाशक नियंत्रण के लिए इमिडाक्लेपि्रिड दवा का एक लीटर मात्रा को 300 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें. इनके प्रकोप से बचाने के लिए क्लोरोफायरीफांस के संतुलित मात्रा का इस्तेमाल करें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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