खूंटी. प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) के एरिया कमांडर हाबिल मुंडू उर्फ प्रफुल्ल मुंडा ने बुधवार को खूंटी की उपायुक्त आर रॉनिटा और पुलिस अधीक्षक मनीष टोप्पो के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. उपायुक्त व एसपी ने गुलदस्ता देकर उसका स्वागत किया. प्रफुल्ल के खिलाफ विभिन्न थानों में 22 मामले दर्ज हैं. सरकार ने प्रफुल्ल के खिलाफ एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था. एसपी कार्यालय में आत्मसमर्पण के दौरान प्रफुल्ल की पत्नी रंदाय कंडीर और उसका बच्चा भी मौजूद थे. एसपी मनीष टोप्पो ने कहा कि झारखंड सरकार के नक्सलमुक्त राज्य के संकल्प के तहत चलाए जा रहे अभियान में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है. प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीएलएफआई के एरिया कमांडर हाबिल मुंडू उर्फ प्रफुल्ल मुंडा ने सरकारी आत्मासमर्पण नीति से प्रभावित होकर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया. हाबिल मुरहू प्रखंड के कोड़ाकेल पंचायत अंतर्गत बम्हनी गांव का निवासी है. उसके खिलाफ मुरहू, खूंटी, कर्रा और तोरपा थाना में उग्रवादी हिंसा सहित अन्य संगीन मामलों को लेकर करीब 22 मामले दर्ज हैं. खूंटी पुलिस कार्यालय में उपायुक्त आर रॉनिटा और पुलिस अधीक्षक मनीष टोप्पो के समक्ष उसने आत्मसमर्पण किया. इस दौरान उपायुक्त ने उग्रवादी समर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत एक लाख रुपये का चेक प्रदान किया. एसपी मनीष टोप्पो ने बताया कि आत्मसमर्पण के दौरान उसने नौ एमएम पिस्टल, 7.65 एमएम पिस्टल, एक देसी कट्टा, 13 कारतूस और दो वॉकी-टॉकी पुलिस को सौंपे.उन्होंने कहा कि झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ, झारखंड जगुआर और अन्य केंद्रीय अर्धसैनिक बलों द्वारा चलाये जा रहे संयुक्त अभियान से उग्रवादी संगठनों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है. साथ ही राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति “नयी दिशा” का भी सकारात्मक प्रभाव दिख रहा है. एसपी के अनुसार, संगठन के भीतर शोषण, भय और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से परेशान होकर कई उग्रवादी संगठन छोड़ रहे हैं या आत्मसमर्पण कर रहे हैं.