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खूंटी में नीलगाय का आतंक, फसल को पहुंचा रहीं नुकसान

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खूंटी में नीलगाय का आतंक, फसल को पहुंचा रहीं नुकसान

खूंटी. प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों नीलगाय का आतंक काफी बढ़ा हुआ है. नीलगाय के बढ़ते आतंक से किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. झुंड के रूप में पहुंच रही नील गायें खेतों में खड़ी फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा रही हैं. रात-दिन खेतों की रखवाली करना किसानों के असंभव प्रतीत हो रहा है. नीलगाय के आतंक के आगे किसान खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं. प्रखंड के भोंडा, भुवाटोली, जूरदाग, वन गनलोया, इदरी, बेलवादाग, चीरू हातु, पांडु, छाता समेत दर्जनों गांवों में प्रतिदिन नीलगाय आतंक मचा रहे हैं. किसान बताते हैं कि बड़ी संख्या में नीलगाय खेतों में घुस कर फसलों को न सिर्फ चर जाती हैं, बल्कि रौंद कर भी बर्बाद कर देती हैं. इससे फसल पनपने का मौका ही नहीं मिल पा रहा है. जूरदाग के किसान विश्वकर्मा कोइरी, बालेश्वर कोइरी, अजय मिंज, अनिल तथा बिजगा मुंडा ने बताया कि गेहूं और हरी सब्जियों की फसल को नीलगाय प्रतिदिन नष्ट कर रही है. किसान बताते हैँ कि एक साथ झुंड में आनेवाली नीलगाय जिस खेत में प्रवेश करती हैं, वहां की पूरी फसल बर्बाद कर देती हैं. किसानों द्वारा उन्हें भगाने का प्रयास किया जाता है, लेकिन अगले ही दिन वे फिर लौट आती हैं. किसानों का कहना है कि नीलगाय को मारने पर प्रतिबंध होने के कारण इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है. वहीं वन विभाग और कृषि विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं होने से समस्या और गंभीर होती जा रही है. नीलगाय अब खरीफ फसलों जैसे मक्का, मूंग, अरहर तथा रबी फसलों जैसे चना, मटर, आलू और अन्य सब्जियों को भी भारी नुकसान पहुंचा रही हैं. स्थिति यह हो गयी है कि किसान अब महंगी फसलों की खेती से दूरी बनाने लगे हैं. वर्तमान में तरबूज की फसल भी नीलगायों के निशाने पर है. किसानों ने बताया कि नीलगाय और जंगली हाथियों के बढ़ते आतंक के कारण वे अब केवल धान जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर होते जा रहे हैं. इससे उन्हें मुनाफे के बजाय लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. झारखंड मुक्ति मोर्चा के संगठन सचिव वीरेंद्र सिंह ने वन विभाग तथा कृषि विभाग से नीलगाय के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है.

गेहूं और हरी सब्जियों की फसल को नीलगाय प्रतिदिन नष्ट कर रही

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