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Home झारखण्ड खूंटी खूंटी के कारो नदी से धड़ल्ले से हो रहा बालू का अवैध उठाव, पुल हो गया जर्जर

खूंटी के कारो नदी से धड़ल्ले से हो रहा बालू का अवैध उठाव, पुल हो गया जर्जर

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खूंटी के कारो नदी से धड़ल्ले से हो रहा बालू का अवैध उठाव, पुल हो गया जर्जर
खूंटी के कर्रा में कारो नदी के किनारे डंप किया गया बालू.

कर्रा से सागीर अहमद की रिपोर्ट

Illegal Sand Mining: झारखंड के खूंटी जिले के कर्रा प्रखंड के बकसपुर पंचायत के लापा गांव से लापूंग प्रखंड के कथकुवारी गांव तक कारों नदी से बालू के अवैध उठाव का कारोबार जोरों पर है. बालू के अवैध उठाव के कारण खूंटी को रांची से जोड़ने के लिए कारों नदी पर बना पुल कभी भी ढह सकता है. पुल काफी जर्ज हो गया है. स्थिति यह है कि बालू के खनन की वजह से पुल के पिलरों की नींव तक दिखाई देने लगी है और वह भी कमजोर हो गई है. अगर यही सिलसिला जारी रहा, तो यह पुल कभी भी धराशायी हो सकता है.

क्या कहते हैं ग्रामीण

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, काफी दिनों से खूंटी के कर्रा प्रखंड के लापा गांव, रांची के लापूंग प्रखंड के कथकुवारी गांव, गुमला जिला के कमडरा प्रखंड के मुरूगकेला गांव के सीमावर्ती क्षेत्र से सटा कारों नदी से बालू का उत्खनन हो रहा है. इस कारण पुल की स्थित जर्जर हो गयी है. बालू उठाव के कारण पुल के पिलर के आसपास बालू समाप्त हो गया है. जिसके कारण पिलर के नीचे का भाग नजर आ रहा है. वहीं पीलर में लगी कंक्रीट खत्म हो रही है. अब पीलर के छड़ साफ नजर आने लगे हैं.

2007-08 में बना था पुल

पुल का निर्माण वर्ष 2007-08 में किया गया था. पुल का तो निर्माण किया गया लेकिन सड़क का निर्माण नहीं हुआ. यह पुल खूंटी और रांची जिले को भी जोड़ता है. बालू उठाव का ग्रामीणों ने विरोध किया है. फिलहाल ग्रामीण बालू के अवैध उठाव के खिलाफ संगठित होकर बालू के उठाव पर रोक लगाने का प्रयास कर रहे हैं.

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कई बार हुई कार्रवाई, पर नहीं रुका बालू उठाव

इस इलाके में खूंटी जिला प्रशासन द्वारा कई बार अवैध बालू के खिलाफ कार्रवाई की गई है. कई हाइवा, ट्रैक्टर, जेसीबी मशीन और अवैध रूप से डंप किया गया बालू को जब्त किया गया है. वहीं, वन विभाग के द्वारा भी कई बार कार्रवाई की गई है. इसके बाद भी बालू का अवैध उठाव बंद नहीं हुआ है. जब प्रशासन सख्ती बरतता है, तो बालू तस्कर रांची जिला क्षेत्र से बालू का उठाव करने लग जाते हैं. रांची जिला की ओर से कार्रवाई होती है, तो गुमला जिला क्षेत्र से उठाव शुरू हो जाता है. इसी प्रकार बालू का उठाव लगातार जारी ही रहता है. बालू के लगातार उठाव का असर पुल पर पड़ रहा है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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