[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Rajya झारखण्ड असम में हिमंता को टक्कर देने की तैयारी में जुटे हेमंत, विधानसभा की 35-40 सीटों पर झामुमो की नजर

असम में हिमंता को टक्कर देने की तैयारी में जुटे हेमंत, विधानसभा की 35-40 सीटों पर झामुमो की नजर

0
असम में हिमंता को टक्कर देने की तैयारी में जुटे हेमंत, विधानसभा की 35-40 सीटों पर झामुमो की नजर
असम के तिनसुकिया में आदिवासी संगठनों की महासभा में तीर-धनुष ताने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (बाएं से चौथे क्रम में). फाइल फोटो

JMM Assam Politics: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) अब झारखंड की सीमाओं से बाहर निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. इसी कड़ी में पार्टी की नजर असम पर टिकी है, जहां वह आगामी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को सीधी चुनौती देने की तैयारी में जुट गई है. झामुमो का फोकस उन इलाकों पर है, जहां आदिवासी और चाय बागान मजदूर निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

35 से 40 विधानसभा सीटों पर नजर

झामुमो असम की करीब 35 से 40 विधानसभा सीटों का आकलन कर रहा है. ये वे सीटें हैं, जहां आदिवासी आबादी और टी-ट्राइब (चाय जनजाति) मतदाताओं की संख्या काफी प्रभावशाली मानी जाती है. असम में आदिवासी आबादी करीब 70 लाख है, जो राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 20% है. 2011 की जनगणना के अनुसार, इनमें से केवल 38.8 लाख लोगों को ही अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है.

आदिवासी असंतोष को भुनाने की कोशिश

झामुमो का मानना है कि असम में आदिवासी समुदाय लंबे समय से राजनीतिक उपेक्षा और सामाजिक-आर्थिक भेदभाव का शिकार रहा है. पार्टी का दावा है कि भाजपा सरकार ने आदिवासियों को उनकी पारंपरिक पहचान, सामाजिक अधिकार और आर्थिक मजबूती से दूर रखा है. इसी असंतोष को झामुमो अपने पक्ष में भुनाने की रणनीति बना रही है.

तिनसुकिया की रैली से दिया सियासी संकेत

1 फरवरी को झारखंड के मुख्यमंत्री और झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन असम के तिनसुकिया जिले पहुंचे थे. यहां उन्होंने ऑल आदिवासी स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ असम द्वारा आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित किया, जिसमें करीब 30 हजार लोग शामिल हुए. इसी मंच से हेमंत सोरेन ने असम में झामुमो की राजनीतिक एंट्री के संकेत दे दिए.

अपने संबोधन में हेमंत सोरेन ने आदिवासियों से एकजुट होकर मतदान करने की अपील की. उन्होंने कहा कि यदि आदिवासी समुदाय संगठित हो जाए, तो वह असम की राजनीति की दिशा और दशा बदल सकता है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि राजनीतिक सशक्तिकरण के जरिए झारखंड की तरह असम में भी आदिवासी परिवारों को कल्याणकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता और सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सकता है.

संगठन मजबूत करने को भेजी गई टीम

असम दौरे से पहले झामुमो ने एक चार सदस्यीय टीम वहां भेजी थी, जिसमें राज्य के कल्याण मंत्री चमरा लिंडा, सांसद विजय हांसदा, विधायक एमटी राजा और भूषण टुडू शामिल थे. इस टीम ने असम में विभिन्न दलों और संगठनों से जुड़े आदिवासी नेताओं के साथ बंद कमरे में बैठकें कीं. इन बैठकों में जमीनी हालात, राजनीतिक संभावनाओं और सामाजिक समीकरणों पर विस्तार से चर्चा हुई. इन्हीं बैठकों के बाद तिनसुकिया में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सभा आयोजित की गई, जिससे झामुमो की रणनीति को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गईं.

चुनाव लड़ने पर अंतिम फैसला बाकी

झामुमो के महासचिव विनोद पांडेय ने स्पष्ट किया है कि प्रतिनिधिमंडल का दौरा फिलहाल असम के आदिवासियों, खासकर टी-ट्राइब समुदाय की जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए था. उन्होंने कहा कि पार्टी चुनाव लड़ेगी या नहीं, इसका अंतिम निर्णय झामुमो के अध्यक्ष ही लेंगे. बावजूद इसके, पार्टी नेताओं का मानना है कि असम के आदिवासी चाहते हैं कि उन्हें हेमंत सोरेन का नेतृत्व और समर्थन मिले.

भाजपा झामुमो को बता रही कमजोर

सत्तारूढ़ भाजपा झामुमो की असम में मौजूदगी को हल्के में आंक रही है. भाजपा नेताओं का कहना है कि झामुमो की असम में न तो कोई मजबूत संगठनात्मक पकड़ है और न ही व्यापक जनाधार है. लेकिन, झामुमो का तर्क है कि आदिवासी समाज के बीच पार्टी की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है.

इसे भी पढ़ें: सरकारी स्कूलों की 12 लाख छात्राओं को फ्री में मिलेगा सेनेटरी पैड, तैयारी में हेमंत सोरेन सरकार

कांग्रेस भी मैदान में सक्रिय

असम विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस भी पूरी तरह सक्रिय हो गई है. कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष और असम विधानसभा चुनाव की पर्यवेक्षक प्रीति टिक्कू राज्य के दौरे पर हैं. उन्होंने कोकराझार पहुंचकर जिला कांग्रेस कार्यालय में पार्टी नेताओं के साथ बैठक की. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस बार का विधानसभा चुनाव सांप्रदायिकता के खिलाफ निर्णायक लड़ाई है. उनका आरोप है कि भाजपा सरकार एक ओर आम लोगों के अधिकारों का हनन कर रही है, तो दूसरी ओर आदिवासियों को सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से कमजोर कर रही है.

इसे भी पढ़ें: कमीशन के पैसों से मौज करते थे इंजीनियर साहब! ईडी ने जब्त कर ली संपत्ति

Previous article निवास प्रमाण पत्र के लिए कोलकाता नगर पालिका में रिकॉर्ड आवेदन, फार्म लेने के लिए खोले गये कई काउंटर
Next article Bangladesh-US Trade Deal : बांग्लादेशी उत्पादों पर डोनाल्ड ट्रंप के रहम का कारण क्या?
Avatar Of Kumarvishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel