[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Rajya झारखण्ड ओके ::: ज्यूडिशियल सिस्टम में लोगों के भरोसे व विश्वास को बनाये रखना जरूरी : जस्टिस राजेश बिंदल

ओके ::: ज्यूडिशियल सिस्टम में लोगों के भरोसे व विश्वास को बनाये रखना जरूरी : जस्टिस राजेश बिंदल

0
ओके ::: ज्यूडिशियल सिस्टम में लोगों के भरोसे व विश्वास को बनाये रखना जरूरी : जस्टिस राजेश बिंदल

न्यायिक प्रणाली में लोगों के भरोसा व विश्वास का संरक्षण विषयक राज्य स्तरीय सम्मेलन

फोटो अमित दास

वरीय संवाददाता, रांची

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस राजेश बिंदल ने कहा है कि लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाये रखने और संवैधानिक लक्ष्यों को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए ज्यूडिशियल सिस्टम में जनता के भरोसे और विश्वास को बनाये रखना जरूरी है. ज्यूडिशियल सिस्टम आधुनिक समय की कई चुनौतियों का सामना कर रही है और यह समय की मांग है कि ज्यूडिशियल सिस्टम को चुनौतियों का तेजी से जवाब देने के लिए सक्रिय होना चाहिए. ट्रायल कोर्ट में मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए न्यायाधीशों को तकनीक अपनानी चाहिए और टेक्नोलॉजी का उपयोग करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए. जस्टिस बिंदल बताैर मुख्य अतिथि शनिवार को धुर्वा स्थित झारखंड ज्यूडिशियल एकेडमी के डॉ एपीजे अब्दुल कलाम सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. सम्मेलन का विषय ज्यूडिशियल सिस्टम में लोगों के भरोसे और विश्वास का संरक्षण था.

जस्टिस बिंदल ने जेलों में कैदियों व विचाराधीन कैदियों की बढ़ती संख्या के बारे में जिक्र करते हुए इस बात पर जोर दिया कि जेल में पैरा लीगल वोलेंटियर को कैदियों के मामलों को आगे बढ़ाने के लिए संवेदनशील बनाया जाना जरूरी है. उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट के न्यायाधीशों को वादियों के साथ बातचीत करने और मामले को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिलता है. मामलों के निष्पादन में विलंब के बारे में जस्टिस बिंदल ने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए हाइकोर्ट स्तर पर कार्य योजना की तैयारी, केस प्रबंधन व मुकदमेबाजी प्रबंधन प्रणाली जैसे नवीन विचारों को विकसित करना तथा अपनाना आज समय की मांग है. उन्होंने ज्यूडिशियल सिस्टम में सूचना व प्रौद्योगिकी के उपयोग पर बल दिया. जस्टिस बिंदल ने न्यायिक अधिकारियों को सोशल मीडिया के उपयोग के प्रति आगाह किया और कहा कि हमें व्यक्तिगत व व्यावसायिक उपयोग में सोशल मीडिया के उपयोग और अनुप्रयोग के प्रति संवेदनशील होना चाहिए. कलकत्ता हाइकोर्ट के जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने प्ली बार्गेनिंग के अधिक उपयोग की आवश्यकता बतायी. उन्होंने कहा कि भारत में प्ली बार्गेनिंग को गति नहीं मिल रही है. जस्टिस बागची ने कहा कि सोशल मीडिया हैंडल का उपयोग गैर-विवाद के सिद्धांत के साथ किया जाना चाहिए. वादियों को निष्पक्ष, विनम्र, सम्मानजनक व्यवहार व न्याय देने में प्रक्रियात्मक निष्पक्षता मिलने पर जनता का भरोसा व विश्वास बढ़ता है. झारखंड हाइकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस एस चंद्रशेखर ने लंबित मामलों की समस्याओं पर चर्चा करते हुए कहा कि लंबित मामले न्यायपालिका में जनता के विश्वास व भरोसे को कायम रखने में एक बड़ी बाधा है. उन्होंने मलेशिया, सिंगापुर, सर्बिया जैसे देशों में मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए अच्छी प्रथाओं का उदाहरण देते हुए सुझाव दिया कि अच्छी प्रथाओं को पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से लागू करना चाहिए. उन्होंने न्यायिक अधिकारियों को पुराने मामलों के लिए कार्य योजना की आवश्यकता पर भी जोर दिया. कार्यक्रम के दाैरान नये आपराधिक कानूनों पर विचार-विमर्श किया गया. नये कानून एक जुलाई 2024 से लागू होने जा रहा है. मौके पर हाइकोर्ट के न्यायाधीशगण, न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता आदि उपस्थित थे.

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel