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झारखंड निकाय चुनाव में 25 लाख से ज्यादा नहीं उड़ा पाएंगे प्रत्याशी, चुनाव आयोग को देना होगा हिसाब-किताब

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झारखंड निकाय चुनाव में 25 लाख से ज्यादा नहीं उड़ा पाएंगे प्रत्याशी, चुनाव आयोग को देना होगा हिसाब-किताब
चुनावी खर्च पर झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग ने सीमाएं तय कीं.

Jharkhand Civic Polls Expenditure: झारखंड में होने वाले नगर निकाय चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रत्याशियों के चुनावी खर्च की अधिकतम सीमा तय कर दी है. आयोग ने साफ किया है कि इस बार के चुनाव में धनबल के दुरुपयोग पर कड़ी नजर रखी जाएगी. हर प्रत्याशी को अपने खर्च का पूरा हिसाब-किताब तय समय सीमा के भीतर जमा करना अनिवार्य होगा. खर्च सीमा से अधिक राशि खर्च करने या गलत जानकारी देने पर प्रत्याशी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, यह व्यवस्था चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और समान अवसर वाला बनाने के उद्देश्य से लागू की गई है. आयोग ने सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों और नगर निकाय चुनाव से जुड़े अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे खर्च निगरानी तंत्र को पूरी तरह सक्रिय रखें.

आबादी के आधार पर तय की गई खर्च सीमा

राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत के प्रत्याशियों के लिए अलग-अलग खर्च सीमा तय की गई है. यह सीमा जनगणना 2011 के अनुसार संबंधित शहरी निकाय की आबादी को आधार मानकर निर्धारित की गई है, ताकि बड़े और छोटे निकायों के बीच संतुलन बना रहे. आयोग का कहना है कि खर्च सीमा तय करने का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी प्रत्याशी अत्यधिक धन खर्च कर चुनावी माहौल को प्रभावित न कर सके और आम उम्मीदवार भी समान शर्तों पर चुनाव लड़ सकें.

नगर निगम में महापौर और पार्षदों के लिए खर्च सीमा

नगर निगमों के लिए खर्च सीमा दो श्रेणियों में तय की गई है. जिन नगर निगमों की आबादी 10 लाख से अधिक है, वहां महापौर पद के प्रत्याशी अधिकतम 25 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे. वार्ड पार्षद पद के प्रत्याशियों के लिए खर्च की अधिकतम सीमा 5 लाख रुपये तय की गई है. जिन नगर निगमों की आबादी 10 लाख से कम है, वहां महापौर पद के प्रत्याशी अधिकतम 15 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे. इन नगर निगमों में वार्ड पार्षद पद के प्रत्याशियों के लिए खर्च सीमा 3 लाख रुपये तय की गई है.

नगर परिषद के प्रत्याशियों के लिए कितनी होगी सीमा

नगर परिषदों में भी आबादी के आधार पर खर्च सीमा तय की गई है. एक लाख से अधिक आबादी वाले नगर परिषद क्षेत्रों में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी अधिकतम 10 लाख रुपये खर्च कर सकेंगे, जबकि वार्ड पार्षद के लिए यह सीमा 2 लाख रुपये रखी गई है. एक लाख से कम आबादी वाले नगर परिषद क्षेत्रों में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी 6 लाख रुपये तक और वार्ड पार्षद 1.5 लाख रुपये तक चुनाव खर्च कर सकेंगे.

नगर पंचायतों के लिए भी अलग प्रावधान

राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर पंचायतों के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं. जिन नगर पंचायतों की आबादी 12 हजार से अधिक और 40 हजार से कम है, वहां अध्यक्ष पद के प्रत्याशी अधिकतम 5 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे. वार्ड पार्षद पद के प्रत्याशियों के लिए खर्च सीमा 1 लाख रुपये तय की गई है. आयोग ने संकेत दिए हैं कि अन्य श्रेणियों की नगर पंचायतों के लिए भी इसी तर्ज पर खर्च सीमा लागू रहेगी.

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खर्च पर रहेगी सख्त निगरानी, हर गतिविधि पर नजर

राज्य निर्वाचन आयोग ने साफ कहा है कि इस बार चुनाव खर्च पर सख्त निगरानी रखी जाएगी. इसके लिए उड़नदस्ता दल, लेखा निगरानी टीम और वीडियो सर्विलांस टीमों को सक्रिय किया जाएगा. प्रचार गाड़ियों, जनसभाओं, पोस्टर-बैनर, सोशल मीडिया प्रचार और अन्य सभी चुनावी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी. प्रत्याशियों को बैंक खाते के माध्यम से खर्च करने, रजिस्टर में हर खर्च दर्ज करने और निर्धारित तिथि पर खर्च का ब्योरा जमा करना अनिवार्य होगा. नियमों के उल्लंघन की स्थिति में नोटिस, जुर्माना और यहां तक कि उम्मीदवारी रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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