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झारखंड के अंतिम आदमी तक पहुंचेगा हेमंत सरकार का विकास, अबुआ दिशोम बजट में संकल्प

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झारखंड के अंतिम आदमी तक पहुंचेगा हेमंत सरकार का विकास, अबुआ दिशोम बजट में संकल्प
विधानसभा में बजट पेश करने से पहले राज्यपाल संतोष गंगवार के साथ वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर.

Jharkhand Budget 2026: झारखंड विधानसभा में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अबुआ दिशोम बजट पेश कर दिया है. विधानसभा में पेश बजट पर उन्होंने कहा कि यह बजट राज्य सरकार की विकासोन्मुख सोच और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अबुआ झारखंड का संकल्प केवल एक नारा नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की ठोस नीति है. सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज के हर वर्ग (गरीब, किसान, मजदूर, महिला, युवा, आदिवासी, दलित और वंचित समुदाय) को योजनाओं का सीधा लाभ मिले. उन्होंने कहा कि सरकार ने यह साबित किया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद विकास की गति को रोका नहीं जाएगा. सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, पेंशन, आवास, खाद्य सुरक्षा और आजीविका कार्यक्रमों के माध्यम से कमजोर वर्गों को मजबूत आधार देने का प्रयास किया गया है.

किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर

वित्त मंत्री ने बताया कि राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए पूंजीगत व्यय में वृद्धि की गई है. सड़क, सिंचाई, बिजली और पेयजल जैसी आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया है. कृषि क्षेत्र को राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराने और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने का प्रावधान बजट में किया गया है. सरकार का लक्ष्य है कि कृषि उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण और विपणन की बेहतर व्यवस्था विकसित हो, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके.

महिला सशक्तिकरण सरकार की प्राथमिकता

उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. मंईयां सम्मान योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान किया जा रहा है. स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहन, पोषण कार्यक्रमों का विस्तार और स्वरोजगार योजनाओं को बढ़ावा देकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं.

स्वास्थ्य और शिक्षा में व्यापक सुधार

स्वास्थ्य क्षेत्र में जिला अस्पतालों के उन्नयन, नई स्वास्थ्य योजनाओं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं. शिक्षा क्षेत्र में स्कूलों की आधारभूत संरचना सुधार, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा और उच्च शिक्षा संस्थानों को सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखा गया है. यह बजट विकास और सामाजिक न्याय के संतुलन का संदेश देता है.

कृषि, पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र

सरकार का लक्ष्य किसानों को कर्ज से मुक्ति, समग्र कृषि विकास और आय वृद्धि है. पीएलएफएस के अनुसार कृषि में रोजगार 44.3% से बढ़कर 50.4% हुआ है। बिरसा बीज उत्पादन योजना का आवंटन 95 करोड़ से बढ़ाकर 145 करोड़ किया गया है. मृदा एवं जल संरक्षण के लिए “बंजर भूमि राइस फैलो” और “जलनिधि” योजनाओं पर 475.50 करोड़ का प्रावधान है. सौर ऊर्जा चालित सिंचाई के लिए 75 करोड़ तथा कृषि यंत्र वितरण पर 80 करोड़ रुपये निर्धारित हैं. झारखंड मिलेट मिशन के लिए 25 करोड़ और नकदी फसल विकास के लिए 19.88 करोड़ का प्रावधान है.

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मधुमक्खी और शहरी फार्मिंग पर 245.80 करोड़

उद्यान, मधुमक्खी, लाह, हाईटेक पार्क और शहरी फार्मिंग पर 245.80 करोड़ तथा मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना पर लगभग 481.35 करोड़ आवंटित किए गए हैं. फसल बीमा योजना के लिए 400 करोड़ निर्धारित हैं. भंडारण संरचना, कोल्ड रूम और गोदाम निर्माण के लिए लगभग 322 करोड़ रुपये का प्रावधान है. मत्स्य विकास पर 106 करोड़ तथा कृषि-संबद्ध कुल बजट 4,884.20 करोड़ रखा गया है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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