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झारखंड के अबुआ दिशोम बजट में बालकों और थर्ड जेंडर पर विशेष जोर

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झारखंड के अबुआ दिशोम बजट में बालकों और थर्ड जेंडर पर विशेष जोर
झारखंड विधानसभा में बजट पेश करने जाते वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर. फोटो: प्रभात खबर

Jharkhand Budget 2026: झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की ओर से विधानसभा में पेश अबुआ दिशोम बजट 2026-27 में समावेशी विकास की स्पष्ट झलक दिखाई देती है. इस बजट का कुल योजना आकार 1,00,891 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जिसमें बच्चों और जेंडर समानता को विशेष प्राथमिकता दी गई है. राज्य सरकार ने बाल कल्याण के लिए 10,793.16 करोड़ रुपये का अलग “बाल बजट” निर्धारित किया है, जो यह दर्शाता है कि आने वाली पीढ़ी के सर्वांगीण विकास को नीति के केंद्र में रखा गया है.

बाल बजट का उद्देश्य और प्राथमिकताएं

बाल बजट के अंतर्गत शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य, सुरक्षा और कौशल विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं को मजबूती दी जाएगी. आंगनबाड़ी सेवाओं के विस्तार, पूरक पोषाहार, विद्यालयी आधारभूत संरचना सुधार, डिजिटल शिक्षा और छात्रवृत्ति जैसी पहलों के माध्यम से बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव तैयार की जा रही है. विशेष रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया गया है, ताकि कोई भी बच्चा विकास की मुख्यधारा से वंचित न रहे. कुपोषण उन्मूलन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना इस बजट की प्रमुख दिशा है.

जेंडर बजट और थर्ड जेंडर सशक्तिकरण

जेंडर बजट के तहत 34,211.27 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. यह राशि महिलाओं के साथ-साथ थर्ड जेंडर समुदाय के सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है. सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, पेंशन, शिक्षा सहायता, कौशल विकास और रोजगार सृजन कार्यक्रमों के माध्यम से जेंडर समानता को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है. थर्ड जेंडर समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने, सम्मानजनक आजीविका और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की प्रतिबद्धता इस बजट में स्पष्ट दिखती है.

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समावेशी और संतुलित विकास की दिशा

यह बजट केवल आर्थिक प्रावधानों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय और समान अवसर की सोच को भी मजबूत करता है. सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए सामाजिक सुरक्षा, कृषि विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के संतुलित विस्तार पर ध्यान दिया है. कुल मिलाकर, यह बजट बच्चों और जेंडर विविधता को केंद्र में रखकर समावेशी एवं सतत विकास की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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