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Home झारखण्ड जामताड़ा भाषाओं के बीच टकराव न होकर समन्वय होनी चाहिए : डॉ काशीनाथ

भाषाओं के बीच टकराव न होकर समन्वय होनी चाहिए : डॉ काशीनाथ

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भाषाओं के बीच टकराव न होकर समन्वय होनी चाहिए : डॉ काशीनाथ

जामताड़ा. ईश्वर चंद्र विद्यासागर लिटिल मैगजीन-सह-ग्रंथ मेला समिति, जामताड़ा की ओर से पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर की 205वीं जयंती पर 28 सितंबर तक मेला का आयोजन किया गया. मेला का समापन शनिवार को संत एंथोनी स्कूल परिसर में शहीदे आजम भगत सिंह की 118वीं जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित कर हुआ. इस दौरान क्षेत्रीय भाषाओं की चुनौतियों पर संगोष्ठी आयोजित हुई. इस अवसर पर लघु पत्रिका सह पुस्तक मेला के अध्यक्ष प्रो डॉ दीपक कुमार सेन, भारत ज्ञान विज्ञान समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ काशी नाथ चटर्जी, साइंस फॉर सोसाइटी झारखंड के महासचिव डीएनएस आनन्द, नेपाल भाषा परिषद के सदस्य पार्थो कुमार सरकार, बंगाल के प्रतिनिधि शशि वाला वर्मन, खोरठा सहित हिंदी भाषा के कवि धनेश्वर सिंह, डॉ मदन सरकार, हिरणमय तिवारी, तपन मजुमदार, डॉ रामदेव कुमार आदि शामिल हुए. कार्यक्रम का संचालन डाॅ दुर्गा दास भंडारी ने किया. संगोष्ठी में डॉ काशी नाथ चटर्जी ने कहा कि दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली पहली भाषा अंग्रेजी है, दूसरी भाषा चाइनीज है. वहीं तीसरे स्थान पर हिंदी भाषा है. सांतवें स्थान पर बंगला है तथा दसवां स्थान उर्दू को प्राप्त है. झारखंड एक ऐसा राज्य है, जहां अन्य राज्यों की अपेक्षा सबसे ज्यादा 16 भाषाएं बोली जाती है, जिसमें 12 भाषा को क्षेत्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त है. क्षेत्रीय भाषा में कुछ ऐसी भाषा भी ह, जिसे बोला तो जाता है परंतु उक्त भाषा का साहित्य नहीं बना है. प्रयोजन है उस भाषा का भी साहित्य हो. उन्होंने कहा कि भाषाओं के बीच टकराव न हो कर समन्वय होना चाहिए. विभिन्न भाषाओं को लेकर सम्मेलन कराने की आवश्यकता है , सभी क्षेत्रीय भाषाओं में सामग्री निर्माण की आवश्यकता है. ग्रंथ मेला में नेपाल, बंगाल, झारखंड के 45 शिक्षाविद, साहित्यकार, लेखक व कवि मौजूद थे. इस मेले में कुल लघु पत्रिका का 25 से 30 स्टॉल लगा गया था. मौके पर डॉ कंचन गोपाल मंडल, नबारुन मल्लिक, डॉ चंचल भंडारी, रास बिहारी मंडल, राजा अजीत सिंह, भोला नाथ राम, मधेश्वर नाथ भगत, भोला सिंह, काजल कुमार राय आदि थे.

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