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कुरमी-कुड़मी को आदिवासी का दर्ज देने की मांग का जताया विरोध

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कुरमी-कुड़मी को आदिवासी का दर्ज देने की मांग का जताया विरोध

आदिवासी संगठनों ने जामताड़ा में निकाली जनाक्रोश रैली आदिवासी समाज की अपनी भाषा, संस्कृति, पूजा-पद्धति हैं : मंगल सोरेन प्रतिनिधि, जामताड़ा. सूर्या हासंदा एनकाउंटर व कुरमी-कुड़मी को आदिवासी बनाने की मांग के विरोध में सोमवार को आदिवासी संगठनों ने जामताड़ा में जनआक्रोश रैली निकाली. जामताड़ा गांधी मैदान स्थित सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर रैली निकाली, जो टावर चौक, स्टेशन रोड, दुमका रोड होते हुए समाहरणालय पहुंची, जहां सभा में तब्दील हो गयी. जन आक्रोश रैली का नेतृत्व देशमांझी परगना बाईसी समिति, सांवता सुसार आखड़ा आदिवासी सामाजिक संगठन ने संयुक्त रूप से किया. रैली में कुरमी-कुड़मी समाज को आदिवासी दर्जा देने के प्रयासों का विरोध करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गयी. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कुरमी-कुड़मी समाज की ओर से हाल में आयोजित “रेल रोको ” आंदोलन में आदिवासी दर्जा देने की जो मांग की गई थी, वह सांस्कृतिक रूप से गलत है. इसके विरोध में आदिवासी समाज अब एकजुट होकर मैदान में उतर आया है. इस दौरान समाजसेवी सूर्य हांसदा के कथित फर्जी एनकाउंटर की सीबीआइ जांच की भी मांग की गयी. आंदोलन का नेतृत्व सांवता सुसार आखड़ा समिति के अध्यक्ष मंगल सोरेन, देशमांझी परगना बाईसी समिति के अध्यक्ष जगदीश मुर्मू, सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष डॉ श्यामदेव हेंब्रम और मुख्य सलाहकार सुनील हेंब्रम ने किया. मंगल सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी भाषा, संस्कृति, पूजा-पद्धति और परंपराएं हैं, जिनसे कुरमी-कुड़मी समाज का कोई संबंध नहीं है. इसलिए आदिवासी दर्जा देने की मांग का हमलोग विरोध करते हैं. डॉ श्यामदेव हेंब्रम ने चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार ने आदिवासी समाज की मांगों की अनदेखी की, तो झारखंड की सभी राजनीतिक पार्टियों का बहिष्कार किया जाएगा. बालू-कोयला के कारोबार पर रोक लगा दी जायेगी. सभा के बाद राज्य सरकार के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा गया. मौके पर किरण बेसरा सहित अन्य मौजूद थे.

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