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जामताड़ा में मंईयां सम्मान योजना में गड़बड़झाला, कहीं नाबालिग तो बंगाल के निवासी ले रहे पैसा

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जामताड़ा में मंईयां सम्मान योजना में गड़बड़झाला, कहीं नाबालिग तो बंगाल के निवासी ले रहे पैसा
जामताड़ा में नारायणपुर का प्रखंड कार्यालय.

जामताड़ा के नारायणपुर से निकेश कुमार की रिपोर्ट

Prabhat Khabar Impact: झारखंड के जामताड़ा जिले के नारायणपुर प्रखंड में सरकार की महत्वाकांक्षी मंईयां सम्मान योजना में बड़े गड़बड़झाले का खुलासा हुआ है. बीडीओ देवराज गुप्ता की जांच में सामने आया है कि कहीं नाबालिग लड़कियों को योजना का लाभ दिया जा रहा है, तो कहीं पश्चिम बंगाल की महिलाओं के खाते में योजना की राशि पहुंच रही है. यह मामले के सामने आने के बाद पूरे प्रखंड में हड़कंप मच गया है. वहीं, योजना में फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं. दरअसल, 20 मई 2026 को प्रकाशित प्रभात खबर डॉट कॉम की रिपोर्ट ‘मंईयां सम्मान योजना वेरिफिकेशन में बड़ा खेला, 8500 की जांच में एक भी अयोग्य नहीं?’ के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ. खबर में सत्यापन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए गए थे.

8500 जांच में एक भी अपात्र नहीं मिलने पर उठा था सवाल

रिपोर्ट में बताया गया था कि नारायणपुर प्रखंड में मंईयां सम्मान योजना के करीब 34 हजार लाभुक हैं. इन सभी का पंचायत स्तर पर भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है. अब तक करीब 8500 लाभुकों का सत्यापन पूरा हो चुका था, लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि जांच में एक भी लाभुक को अपात्र नहीं पाया गया. इतनी बड़ी संख्या में सत्यापन के बावजूद एक भी गलत लाभुक नहीं मिलने पर प्रशासनिक स्तर पर संदेह गहराने लगा था. योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से जरूरतमंद और पात्र महिलाओं को सहायता देना है. सरकार ने साफ निर्देश दिया है कि केवल योग्य महिलाओं को ही योजना का लाभ मिले. इसी कारण लाभुकों का घर-घर जाकर सत्यापन कराया जा रहा है.

पंचायत सचिव से लेकर शिक्षकों तक को मिली थी जिम्मेदारी

मंईयां सम्मान योजना के लाभुकों के सत्यापन की जिम्मेदारी पंचायत सचिव, आंगनबाड़ी सेविका, सहिया और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को दी गई थी. इन सभी को घर-घर जाकर लाभुकों की स्थिति की जांच करनी थी और यह सुनिश्चित करना था कि योजना का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं. लेकिन शुरुआती जांच रिपोर्ट में एक भी अपात्र लाभुक नहीं मिलने के बाद पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई.

बीडीओ की जांच में कई खुलासे

अब बीडीओ स्तर से दोबारा जांच शुरू होने पर कई चौंकाने वाले मामले सामने आने लगे हैं. जांच में पता चला है कि कुछ जगहों पर नाबालिग लड़कियों के नाम पर योजना की राशि उठाई जा रही थी. वहीं कुछ लाभुक पश्चिम बंगाल के निवासी पाए गए, जो योजना की पात्रता के दायरे में नहीं आते.

फर्जी आधार कार्ड किया गया हेरफेर

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जांच में यह बात भी सामने आया है कि मंईयां सम्मान योजना का लाभ पाने के लिए फर्जी लाभुकों का फर्जी आधार कार्ड जमा कराया गया और उसके आधार उनके खातों में पैसे डलवाए गए. हालांकि, इस मामले में अधिकारी कुछ कहने से परहेज कर रहे हैं.

बीडीओ ने दिए थे दोबारा जांच के आदेश

प्रभारी बीडीओ देवराज गुप्ता ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पहले ही संकेत दे दिए थे कि वे स्वयं पूरे मामले की जांच करेंगे. उन्होंने कहा था कि जिन लाभुकों का सत्यापन हो चुका है, उनकी दोबारा जांच कराई जाएगी. उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा था कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि योजना का लाभ वास्तव में पात्र महिलाओं को ही मिल रहा है या नहीं. यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा सामने आता है, तो संबंधित कर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. अब प्रशासन की सख्ती के बाद पूरे प्रखंड में सत्यापन प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिक गई हैं. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी कई फर्जी लाभुकों का खुलासा हो सकता है.

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योजना की पारदर्शिता पर उठे बड़े सवाल

मंईयां सम्मान योजना में सामने आई गड़बड़ियों ने सरकारी योजनाओं की निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस योजना का उद्देश्य जरूरतमंद महिलाओं को सहायता पहुंचाना था, उसी में अपात्र लोगों के नाम सामने आने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन दोषियों पर क्या कार्रवाई करता है और पात्र महिलाओं तक योजना का लाभ सही तरीके से पहुंचाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.

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