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नारायणपुर का पशु चिकित्सालय भवन जर्जर, हो रही परेशानी

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नारायणपुर का पशु चिकित्सालय भवन जर्जर, हो रही परेशानी

मुरलीपहाड़ी. प्रथमवर्गीय पशु चिकित्सालय का भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है. अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी भी पशु चिकित्सा का बाधक बन रहा है. संसाधनों की कमी की वजह से पशुपालक परेशान रहते हैं. भवन के खिड़की-दरवाजे टूट चुके हैं. काफी समय से भवन का रंग रोगन भी नहीं हुआ है. प्रखंड क्षेत्र के लोग अपने पशुओं के इलाज के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं. इसी जर्जर भवन में अधिकारियों की बैठने, दवा रखने व पशुओं का इलाज हो रहा है. बता दें कि क्षेत्र के विभिन्न गांवों के पशुपालक आते हैं. कई सालों से भवन की मरम्मत नहीं हुआ है. हवा व पानी के कारण दवाइयां खराब हो जाती है. जर्जर भवन में बैठकर कर्मचारी काम करते हैं. बारिश के दिनों में यहां बैठना जोखिम से कम नहीं है. प्रखंड क्षेत्र में पशुपालन लोगों की रोजी-रोटी का एक बड़ा जरिया है. बड़ी संख्या में लोग कृषि व्यवसाय के साथ पशुपालन का काम कर रहे हैं. बेजुबानों के सेहत सुधार के ढांचागत विकास पर नजर डालें तो सब कुछ सन्नाटा दिखाई देता है. संसाधनों की उपलब्धता का भले ही दावा किया जा रहा हो, लेकिन अभी भी यहां दवाओं से लेकर अन्य सुविधाओं का अभाव है, जिस कारण पशुपालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. पशु चिकित्सालय का यह भवन लगभग 40 साल पुराना है. यहां पशु चिकित्सक, टीवीओ का पद स्वीकृत हैं, जो मौजूद हैं. लेकिन चार कर्मी में दो कर्मी कार्यरत हैं. यहां नाइट गार्ड एवं प्राविधिक सहायक लंबे समय से नहीं है. भवन का खिड़की दीमक व बरसात के पानी से सड़ कर गिर चुका है. अस्पताल पर क्षेत्र के पशुओं के इलाज तथा टीकाकरण का जिम्मा है. दवाओं का भी अभाव बना रहता है. कागजों में ही घूम रहे नये भवन निर्माण की मांग मवेशियों के इलाज के लिए प्रखंड मुख्यालय में संचालित पशु चिकित्सालय भवन जर्जर हालत में हैं. रखरखाव करना विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है. नये भवन के निर्माण और मरम्मत के लिए स्थानीय स्तर पर पशुपालन विभाग द्वारा पत्राचार उच्च अधिकारियों को किए गए, लेकिन भवन की हालत अभी भी जस की तस बनी हुई है. एक ओर जहां सरकार नये निर्माण करते हुए विकास को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर प्रखंड मुख्यालय स्थित पशु अस्पताल की अनदेखी कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. कहते हैं बीएचओ जर्जर भवन की मरम्मत के लिए अधिकारियों के पास कई बार पत्र भेजा जा चुका है. मौखिक रूप से भी बताया जा चुका है. चतुर्थवर्गीय कर्मचारी सलाउद्दीन अंसारी इसी माह रिटायर होने जा रहे हैं, जिस कारण अब कर्मियों का भी टोटा होने लगा है. – डॉ सुनील कुमार सिंह, बीएचओ

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