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मनरेगा की भूमि समतलीकरण योजना बदहाल

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मनरेगा की भूमि समतलीकरण योजना बदहाल

नारायणपुर. प्रखंड में चालू वर्ष मनरेगा योजना के तहत भूमि समतलीकरण लगभग 1800 एकड़ में योजना स्वीकृत हुई. वर्तमान समय में 1100 से अधिक ऑनगोइंग है. जबकि विभिन्न पंचायत में 100 से अधिक योजनाएं पूर्ण भी हो गयी हैं. विदित हो कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य उबड़ – खाबड़ जमीन को समतलीकरण कर उसे उपजाऊ बनाना है. 25 पंचायत वाले नारायणपुर प्रखंड में यह योजना इस वर्ष बहुत तेजी से स्वीकृत हुआ और उतनी ही तेजी से पूर्ण होने लगा. सूत्र बताते हैं कि यह योजना प्रखंड क्षेत्र में खाऊ-पकाऊ योजना साबित हो गयी. कहीं थोड़ी बहुत घास छीलकर योजना को संचालित कर दिया, तो कहीं वैसे खेतों को दिखा दिया गया है. जहां अभी धान की रोपाई हो गयी है. इस चालाकी में मनरेगा बिचौलिये से लेकर प्रखंड के कर्मी और पदाधिकारी भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं. सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बात यह है कि इस योजना के लिए प्रति एकड़ लगभग डेढ़ लाख रुपए की राशि प्राक्कलित है. जानकारी यह भी सामने आ रही है कि इस योजना के लिए स्थल पर योजना पट्ट लगाना अनिवार्य था लेकिन कुछेक योजनाओं को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश में योजना पट्ट नहीं लगा है. जानकार यह भी बताते हैं कि लोगों ने जानबूझकर धान रोपाई वाले स्थान को इस योजना के लिए चयन किया है ताकि जब कभी इस योजना का भौतिक सत्यापन हो तो यह कहा जाए कि योजना हुई और उसमें धान की रोपाई कर दी गयी. यह पूरा काम सबकी मिलीभगत के बिना शायद ही संभव हो. लोग बताते हैं कि अगर इसकी तह तक जाकर जांच हो तो बहुत बड़ी हेराफेरी सामने आ सकती है. मनरेगा की इस योजना में पानी की तरह करोड रुपए खर्च कर दिए गए हैं लेकिन यह योजना कितना सार्थक साबित हुई, यह तो भौतिक सत्यापन के बाद ही सामने आ सकेगा. लेकिन लोगों के बीच जो चर्चा है वह तो यह है कि इस योजना में अधिकांश औपचारिकता की गयी है. हालांकि लोगों के बीच की चर्चाओं और भौतिक स्थल पर इस तथ्य की क्या सच्चाई है, यह तो जांच होने पर ही पता चलेगा.

क्या कहते हैं प्रभारी बीडीओ :

योजनाओं की जांच होगी. वर्तमान समय में मनरेगा की भूमि समतलीकरण और मेड़बंदी जैसी योजनाओं में मजदूरी भुगतान पर रोक लगाने का दिशानिर्देश बीपीओ को दिया गया है. किसी भी योजना का क्रियान्वयन निर्धारित मानक के अनुसार ही होगा.

– देवराज गुप्ता, प्रभारी बीडीओ, नारायणपुर.B

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