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Home झारखण्ड जामताड़ा 103 दिन बाद फिर शुरू हुआ मनरेगा का काम, रोजगार सेवकों ने संभाली जिम्मेदारी

103 दिन बाद फिर शुरू हुआ मनरेगा का काम, रोजगार सेवकों ने संभाली जिम्मेदारी

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103 दिन बाद फिर शुरू हुआ मनरेगा का काम, रोजगार सेवकों ने संभाली जिम्मेदारी
जामताड़ा जिले के नारायणपुर प्रखंड कार्यालय में खड़े मनरेगा रोजगार सेवक. फोटो: प्रभात खबर

जामताड़ा से निकेश कुमार की रिपोर्ट

MNREGA Workers Strike End: झारखंड के जामताड़ा जिले में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पिछले 103 दिनों से हड़ताल पर चल रहे मनरेगा रोजगार सेवकों ने सोमवार को कार्य पर वापसी कर ली. लंबे समय से जारी आंदोलन के बाद मनरेगा कर्मी संघ के नेतृत्व में सभी रोजगार सेवक प्रखंड कार्यालय पहुंचे और लिखित आवेदन देकर दोबारा कार्यभार संभालने की जानकारी प्रशासन को दी. इससे मनरेगा योजनाओं के संचालन में फिर से तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है.

हड़ताल से प्रभावित हो रही थीं कई योजनाएं

लगातार 103 दिनों तक चले आंदोलन के कारण प्रखंड क्षेत्र में मनरेगा की कई महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन प्रभावित हो रहा था. मजदूरों को समय पर काम उपलब्ध कराने से लेकर विभिन्न विकास कार्यों के क्रियान्वयन तक कई स्तरों पर दिक्कतें सामने आ रही थीं. ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही योजनाओं की प्रगति भी धीमी पड़ गई थी, जिससे लाभुकों और मजदूरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था.

प्रशासन लगातार कर रहा था वापसी की अपील

हड़ताल के दौरान प्रशासन की ओर से रोजगार सेवकों को लगातार पत्र जारी कर कार्य पर लौटने का आग्रह किया जा रहा था. अधिकारियों द्वारा संवाद और अपील के बाद सोमवार को रोजगार सेवकों ने काम पर लौटने की प्रक्रिया पूरी की. रोजगार सेवकों की वापसी से अब लंबित योजनाओं को गति मिलने और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों में तेजी आने की संभावना बढ़ गई है. आखिर सरकारी योजनाओं का पहिया भी कब तक रुका रहता, 103 दिन की खामोशी के बाद व्यवस्था फिर पटरी पर लौटने लगी है.

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राधेश्याम पंडित के नेतृत्व में संभाली जिम्मेदारी

मनरेगा कर्मी संघ के राधेश्याम पंडित के नेतृत्व में हुई कार्य पर वापसी की इस प्रक्रिया के दौरान अनिल चौधरी, अब्दुल्लाह, मेघलाल रजक, सरीफ आलम, सुमंतो दास, हैदर अली, मो. सुल्तान, वाहिद अंसारी, इदरीश अंसारी, अब्दुल मलिक, लखिन्द्र हेमब्रम और सदानंद राणा समेत अन्य रोजगार सेवक मौजूद रहे. सभी ने सामूहिक रूप से प्रखंड कार्यालय पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और पुनः जिम्मेदारियों का निर्वहन शुरू कर दिया. रोजगार सेवकों की वापसी से मनरेगा से जुड़े कार्यों के सामान्य होने और ग्रामीण विकास योजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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