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स्वभाव में परिवर्तन केवल सत्संग से ही आ सकता है : कथावाचक

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स्वभाव में परिवर्तन केवल सत्संग से ही आ सकता है : कथावाचक

नारायणपुर. प्रखंड के गम्भरियाटांड़ गांव आयोजित तीन दिवसीय हनुमत प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ का समापन पूर्णाहुति के साथ में हुआ. अंतिम दिन कथावाचक आचार्य नीतीश कृष्ण ने भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का वर्णन किया. उन्होंने बताया कि भगवान राम का चरित्र मनुष्य जीवन में धारण करने योग्य है, जबकि भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र का चिंतन करना चाहिए. कथावाचक ने कहा कि आशा केवल भगवान से रखनी चाहिए, जबकि मनुष्य आशा अपने पुत्रों तथा सगे संबंधियों से रख रहा है और वह पूर्ण नहीं होने पर दुखी रहने लगता है. मनुष्य को अपने स्वभाव में परिवर्तन करते हुए अपने जीवन की बागड़ोर भगवान पर छोड़ देनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि स्वभाव में परिवर्तन केवल सत्संग से आ सकता है. कहा कि वेद-शास्त्र और संत सोए हुए व्यक्ति को जगाने का काम करते है. मैं और मेरा से छुटकारा दिलाते हैं. मनुष्य जीवन का सार समझाते हैं. उन्होंने समझाया कि मनुष्य शरीर एक मकान की तरह है, जिस प्रकार से धर्मशाला में लोग आते हैं, विश्राम करते हैं और चले जाते हैं. उसी प्रकार हम मनुष्य शरीर में आते हैं, कर्म करते हैं और चले जाते हैं. जिस दिन मैं और मेरा की भूल समझ में आ जाएगी, उसी दिन जीवन सफल होने लगेगा. उन्होंने उपदेश दिया कि मनुष्य को उस परम तत्व का ध्यान करना चाहिए, जिसने हमें सुनने, बोलने, देखने ओर समझाने की शक्ति दे रखी है. कथा के दौरान जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो पूरा पंडाल नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की जयकारों से गूंज उठा. इस दौरान लोग झूमने-नाचने लगे. अंत में आरती हुई. मौके पर अरुण मंडल, सुरेश पंडित, सुभाष मंडल, सुबोध मंडल, शिबू पंडित, गोबिंद पंडित आदि उपस्थित थे. मशहूर भजन गायिका स्वीटी अरमान तथा निशा गुप्ता ने एक से बढ़ कर एक भजन की प्रस्तुति दी.

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