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jamtara news: जामताड़ा में उमड़ा श्रद्धा का महासागर

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jamtara news: जामताड़ा में उमड़ा श्रद्धा का महासागर

संवाददाता जामताड़ा जामताड़ा की भूमि पर गुरुवार को आस्था और श्रद्धा का ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी का मन मोह लिया. यह अवसर था आदिशक्ति मां चंचला के वार्षिक महोत्सव का, जहां 30,000 से अधिक महिलाओं और युवतियों ने कलश यात्रा में भाग लेकर नगर को भक्तिमय कर दिया. जामताड़ा की सड़कों पर पांच किलोमीटर से भी लंबी श्रद्धालुओं की कतारें इस महोत्सव की भव्यता प्रमाण दे रही थीं. शोभा यात्रा की शुरुआत परंपरागत और व्यवस्थित तरीके से हुई. सबसे पहले पांच प्रबुद्ध नागरिकों ने ध्वज लेकर इस पवित्र यात्रा का नेतृत्व किया. इसके बाद डीजे रथ, आदिवासी नृत्य मंडल, वरिष्ठ नागरिकों का पैदल मार्च, महिला ढाकी दल और भव्य रथों की शृंखला ने वातावरण को दिव्यता से भर दिया. मुख्य यजमान, 21 पंडितों के साथ ध्वज लेकर आगे बढ़े, और उनके पीछे हजारों माताओं और बहनों ने कलश लेकर यात्रा को भव्य बना दिया. ठंड के बावजूद भक्तों का अद्भुत उत्साह 8 डिग्री की ठिठुरती ठंड और अहले सुबह का समय भी श्रद्धालुओं की भक्ति में बाधा नहीं बन सका. जामताड़ा नगर के अलावे नाला, कुंडहित, फतेहपुर, नारायणपुर, मिहिजाम सहित अन्य गांवों और कस्बों से बसों और ऑटो में भर-भर कर हजारों श्रद्धालु जामताड़ा पहुंचे. यह आयोजन न केवल जामताड़ा की धार्मिक पहचान बना, बल्कि राज्य में निकली सबसे लंबी कलश यात्राओं में से एक बनने का गौरव प्राप्त किया. चंचला महोत्सव: एक ऐतिहासिक आयोजन चंचला महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र मंडल ने इस महोत्सव को जामताड़ा की धार्मिक और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक बताया. तीन दिनों तक चलने वाले इस उत्सव के पहले दिन निकाली गयी. कलश यात्रा के बाद दूसरे दिन विधिवत पूजन, ब्राह्मण भोजन, कन्या पूजन और भजन संध्या का आयोजन किया जायेगा. तीसरे दिन सांस्कृतिक सह भक्ति जागरण और पूर्णाहुति के साथ महोत्सव का समापन होगा. शहर की रफ्तार थमी, रूट किए गए डायवर्ट गुरुवार सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी. इससे जामताड़ा के मुख्य मार्गों पर आठ घंटे तक यातायात बंद रहा. गांधी मैदान, वीर कुंवर सिंह चौक, सुभाष चौक और रेलवे ओवरब्रिज समेत कई मुख्य स्थानों को श्रद्धालुओं की कतारों के लिए सुरक्षित किया गया. महिला ढाक टीम और पुष्पवर्षा ने बढ़ाई शोभा बंगाल से आयी महिला ढाक टीम और आदिवासी कलाकारों के नृत्य ने महोत्सव को और आकर्षक बना दिया। ढोल-मृदंग की थाप पर नाचते श्रद्धालुओं ने मां चंचला का अभिवादन किया. रास्ते में पुष्पवर्षा के जरिए श्रद्धालुओं का स्वागत हुआ, जिसने आयोजन की भव्यता को नई ऊंचाई दी. सेवा और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नगर में जगह-जगह पानी और शरबत के स्टॉल लगाये गये. पुलिस बल और एंबुलेंस तैनात कर सुरक्षा सुनिश्चित की गयी. वीर कुंवर सिंह चौक पर विशेष एंबुलेंस की व्यवस्था रही. आयोजन समिति के वालंटियर्स हर पल श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे रहे. 50,000 से अधिक भक्तों ने ग्रहण किया प्रसाद कलश यात्रा के समापन के बाद मां चंचला का प्रसाद ग्रहण करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. तीन दिनों की मेहनत से तैयार प्रसाद को 50,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया. मां चंचला की यह भव्य शोभा यात्रा जामताड़ा में एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन गयी. हर वर्ग और समुदाय के लोगों ने इस आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग लिया. यह महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा की जड़ों को सहेजने का माध्यम भी बना. ——————————————— मां चंचला महोत्सव. कलश यात्रा में 30 हजार से अधिक महिला व कन्याएं शामिल, पांच किमी लंबी कतार

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