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सिकल सेल रोग का स्थायी समाधान नहीं

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सिकल सेल रोग का स्थायी समाधान नहीं

जमशेदपुर. सिकल सेल रोग एक आनुवांशिक रक्त विकार है, जो बच्चों में माता-पिता से ही आता है. बच्चों में यह रोग न हो, इसके लिए संतान प्राप्ति से पहले माता-पिता को इससे संबंधित जांच करा लेनी चाहिए. कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम के मेडिसिन विभाग के डॉ बलराम झा ने बताया कि हर माह सिकल सेल एनिमिया की बीमारी से पीड़ित पांच से छह मरीज इलाज कराने के पहुंच रहे हैं. इनमें कुछ की स्थिति गंभीर रहने पर उनका इलाज के लिए भर्ती किया जाता है. उन्होंने बताया कि यह रोग आनुवांशिक होने के कारण इससे पूरी तरह से मुक्त होने का कोई इलाज नहीं है. लेकिन, लक्षण के आधार पर पीड़ितों का इलाज किया जाता है.

क्या है सिकल सेल रोग :

यह अनुवांसिक रोग है. इसके मरीजों के रक्त में हीमोग्लोबिन स्ट्रक्चर के अंदर क्वालिटी चेंज के ट्रेंड दिखायी देते हैं. रक्त कोशिकाओं के हसिया या अर्द्धचंद्राकार में बदल जाने से ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो जाती है और मौत का खतरा बढ़ जाता है.

पीड़ितों में सबसे ज्यादा आदिवासी, जनजाति के लोग

डॉ बलराम झा ने बताया कि एमजीएम अस्पताल में पिछले साल 2023 में सिकल सेल से पीड़ित 120 मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचे थे. वहीं, इस साल अभी तक लगभग 40 मरीजों का इलाज कराया है. इनमें सबसे ज्यादा आदिवासी, जनजाति के लगभग 30 मरीज हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों से इलाज कराने आते हैं. इनमें अधिकतर मरीजों में खून की कमी के लक्षण पाये गये हैं.

10 से 12 सप्ताह के गर्भस्थ शिशु की हो जाती है जांच

एमजीएम के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ के के चौधरी ने बताया कि अस्पताल में माह में तीन से चार बच्चे सिकल सेल एनिमिया से पीड़ित बच्चे इलाज कराने के लिए आते हैं. उन्होंने कहा कि स्त्री-पुरूष दोनों सिकल सेल रोगी है. स्त्री गर्भवती हो तो बच्चे में यह रोग होगा या नहीं, इस बात की जांच 10 से 12 सप्ताह के गर्भ में से सैंपल लेकर किया जा सकता है. यदि बच्चे के सिकल रोग के साथ पैदा होने की संभावना है, तो गर्भपात करवाया जा सकता है.

छह साल की अलिजा का अस्पताल में चल रहा उपचार

चांडिल निवासी फैयाज अहमद की छह साल की बेटी अलिजा सिकलसेल एनीमिया से जूझ रही है. उसे बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराना पड़ता है. उसके हाथ-पैर में दर्द होने पर अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है. इस समय उसका इलाज एमजीएम अस्पताल में चल रहा है. फैयाज अहमद ने बताया कि तीन साल पहले बेटी की तबीयत खराब होने के बाद टीएमएच में भर्ती कराने पर जांच में इस बीमारी का पता चला. तब से इसका इलाज जारी है.

रोग के लक्षण :

हाथ, पैर व कमर में दर्द होना, अस्थिरोग, चक्कर आना, शरीर में ऑक्सीजन की कमी, बार- बार पीलिया होना, लिवर पर सूजन आना, मूत्राशय में रुकावट, दर्द होना, पित्ताशय में पथरी होना, पित्ताशय की पथरी, बार- बार बुखार या जुकाम होना, बच्चों का विकास न होना, रोग प्रतिरोधक शक्ति घटने से दूसरी बीमारियों का आसानी से होना आदि.

बचाव :

विवाह से पहले लड़के और लड़की के खून की सिकल सेल की जांच कराएं, परिवार में किसी भी सदस्य को सिकल सेल एनीमिया हो तो सभी सदस्यों की जांच कराएं, बार-बार पीलिया हो, खून की कमी, जोड़ों में दर्द रहे तो अस्पताल में खून की जांच कराये.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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