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Home झारखण्ड जमशेदपुर जमशेदपुर के हरीश के देसी एआई को मिला ऑफर, भारतीय सेना और आयकर विभाग ने दिखाई दिलचस्पी

जमशेदपुर के हरीश के देसी एआई को मिला ऑफर, भारतीय सेना और आयकर विभाग ने दिखाई दिलचस्पी

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जमशेदपुर के हरीश के देसी एआई को मिला ऑफर, भारतीय सेना और आयकर विभाग ने दिखाई दिलचस्पी
हरीश कुमार के देसी एआई को देख दुबई, एईयू और कनाडा के प्रतिनिधि भी प्रभावित हुए.

नई दिल्ली से संदीप सवर्ण की रिपोर्ट

Jamshedpur Desi AI: नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 में झारखंड के जमशेदपुर निवासी हरीश कुमार द्वारा विकसित देसी एआई मॉडल “एक्चुअलिटी” को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली. पीपुल, प्लानेट और प्रोग्रेस की थीम पर आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय समिट में भारत के साथ-साथ ब्राजील, दुबई और कनाडा के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया. इस मंच पर झारखंड से विकसित स्वदेशी एआई मॉडल ने सुरक्षा और डेटा गोपनीयता के अपने विशेष फीचर्स के कारण सबका ध्यान आकर्षित किया.

सुरक्षा फीचर्स से प्रभावित हुई भारतीय सेना

समिट के दौरान भारतीय सेना के अधिकारियों ने “एक्चुअलिटी” के तकनीकी पहलुओं को नजदीक से समझा. सेना के अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि संवेदनशील और गोपनीय सैन्य जानकारियां विदेशी एआई प्लेटफॉर्म पर साझा करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम भरा हो सकता है. ऐसे में यदि सेना के लिए अलग और सुरक्षित सर्वर आधारित एआई सिस्टम विकसित किया जाए, तो यह अधिक उपयुक्त और सुरक्षित विकल्प होगा.

सैन्य बेस कैंप में डेमो देने का प्रस्ताव

अधिकारियों ने हरीश कुमार को सैन्य बेस कैंप में आकर डेमो देने का प्रस्ताव भी दिया. यह प्रस्ताव इस बात का संकेत है कि भारतीय सेना स्वदेशी तकनीक को प्राथमिकता देने की दिशा में गंभीर है. यदि यह सहयोग आगे बढ़ता है, तो देश की रक्षा प्रणाली में एक बड़ा तकनीकी बदलाव संभव हो सकता है.

आयकर विभाग ने भी दिखाई रुचि

केवल सेना ही नहीं, बल्कि आयकर विभाग के अधिकारियों ने भी इस देसी एआई मॉडल में दिलचस्पी दिखाई. वित्तीय और कर संबंधी संवेदनशील डाटा की सुरक्षा को देखते हुए स्वदेशी और सुरक्षित एआई समाधान की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है. ऐसे में “एक्चुअलिटी” जैसे प्लेटफॉर्म को संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. सरकारी संस्थानों में डेटा लीक और साइबर खतरों की बढ़ती घटनाओं के बीच यह पहल आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

आम लोगों में भी डेटा सुरक्षा को लेकर जागरूकता

मीडिया से बातचीत में हरीश कुमार ने कहा कि लोगों में अपनी निजी और संवेदनशील जानकारी को लेकर चिंता बढ़ी है. विदेशी सर्वरों पर डेटा स्टोर होने को लेकर आम नागरिक भी अब सजग हो रहे हैं. उनका मानना है कि यह बदलते भारत का संकेत है, जहां लोग तकनीक का उपयोग तो करना चाहते हैं, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं करना चाहते. उन्होंने बताया कि “एक्चुअलिटी” को विकसित करने में लगभग 50 लाख रुपये की लागत आई है. सीमित संसाधनों के बावजूद यह मॉडल पूरी तरह भारतीय जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.

चीन की तर्ज पर भारत का स्वदेशी मॉडल

हरीश कुमार ने कहा कि जिस तरह चीन ने अपने देश के लिए सुरक्षित और स्वतंत्र एआई मॉडल विकसित किए हैं, उसी तरह अब भारत के पास भी अपना स्वदेशी विकल्प मौजूद है. विदेशी एआई कंपनियां जहां डेटा लीक और बढ़ती कीमतों की चुनौती पेश कर रही हैं, वहीं “एक्चुअलिटी” एक सुरक्षित, नियंत्रित और किफायती विकल्प के रूप में सामने आया है. उन्होंने यह भी बताया कि यह एआई मॉडल ओपन और मॉड्यूलर आर्किटेक्चर पर आधारित है, जिससे इसे विभिन्न सरकारी और निजी जरूरतों के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है. रक्षा, वित्त, शिक्षा और उद्योग जैसे क्षेत्रों में इसके उपयोग की व्यापक संभावनाएं हैं.

झारखंड के लिए गौरव का क्षण

जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहर से निकली यह पहल झारखंड के लिए भी गर्व का विषय है. अब तक राज्य को खनिज संपदा और उद्योगों के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन यह उपलब्धि दिखाती है कि झारखंड तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना सकता है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छोड़ सकती है छाप

इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 में मिली प्रतिक्रिया ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि स्थानीय प्रतिभाओं को सही मंच और समर्थन मिले, तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ सकती हैं. भारतीय सेना और आयकर विभाग की रुचि इस बात का संकेत है कि स्वदेशी एआई मॉडल आने वाले समय में रणनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

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आत्मनिर्भर भारत में नई उम्मीद

इस पहल ने आत्मनिर्भर भारत और डिजिटल संप्रभुता की दिशा में एक नई उम्मीद जगाई है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि “एक्चुअलिटी” को सरकारी स्तर पर किस प्रकार आगे बढ़ाया जाता है और क्या यह वास्तव में देश की सुरक्षा और डेटा संरक्षण की जरूरतों को पूरा कर पाएगा.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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