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पिलर निर्माण की सामग्री में अनियमितता, जांच की मांग

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पिलर निर्माण की सामग्री में अनियमितता, जांच की मांग

चौपारण. बंजर वनभूमि पर हरियाली लाने और पौधों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग की ओर से कराये जा रहे पीलर निर्माण कार्य सामग्री में अनियमिता बरती जा रही है. निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से जांच की मांग की है. विभाग ने जंगल को बचाने के लिए 6000 हजार पिलर का निर्माण कर रहा है. पिलर में कंटीले तार लगाकर वन की सुरक्षा की जानी है. पौधरोपण को सुरक्षित रखने तथा अवैध चराई और अतिक्रमण रोकने के लिए यह पिलर का निर्माण कराया जा रहा है. लेकिन निर्माण स्थल पर उपयोग किये जा बालू, चिप्स और सीमेंट की गुणवत्ता को लेकर लोगों में नाराजगी है. विधायक प्रतिनिधि राजदेव यादव ने मानकों की अनदेखी कर कम गुणवत्ता वाली सामग्री से निर्माण कराये जाने का आरोप लगाया है. कहा कि पिलर निर्माण के दौरान कम से कम 10 दिनों तक उसके ऊपर मजबूती के लिए पानी डालना है, पर एक दिन भी पानी नहीं दिया जा रहा है. पिलर निर्माण स्थानीय संवेदक या मजदूर से नहीं कराकर बिहार से संवेदक को बुलाकर काम कराया जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार वन संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है. लेकिन यदि निर्माण कार्य में ही लापरवाही बरती जायेगी, तो योजना का उद्देश्य अधूरा रह जायेगा. ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों से निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराने तथा दोषी संवेदक और जिम्मेदार कर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है बंजर भूमि को हरा-भरा बनाने की महत्वाकांक्षी योजना में भ्रष्टाचार और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए. क्या कहते है वनपाल प्रादेशिक वन प्रक्षेत्र के वनपाल संटू कुमार ने कहा पिलर का निर्माण सरकारी मानकों के अनुरूप कराया जा रहा है. समय सीमा के अंदर सभी पिलर बनकर तैयार हो जायेगा. उसके बाद आवश्यकतानुसार वन की सुरक्षा के लिए लगाया जायेगा. सब के प्रयास से बंजर भूमि पर हरियाली लौटेगी. जंगल को सुरक्षित रखा जा सकता है.

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