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ईमानदारी की मिसाल बने मोहन

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ईमानदारी की मिसाल बने मोहन

हजारीबाग. आर्थिक तंगी के दौर में भी ईमानदारी से डिगे बिना मानवता की मिसाल पेश करने वाले सर्किट हाउस के प्रभारी होमगार्ड कर्मी मोहन कुमार को झारखंड सर्वोदय मंडल की ओर से सम्मानित किया गया. गांधी स्मृति यात्रा में शामिल यात्रियों ने शॉल ओढ़ाकर और प्रशस्ति पत्र देकर मोहन कुमार का अभिनंदन किया. सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष विश्वनाथ आजाद ने बताया कि गांधी स्मृति यात्रा के दौरान महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विवि, वर्धा के पूर्व कुलपति प्रो मनोज कुमार, वरिष्ठ गांधीवादी डॉ मनोज मीता और वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत सर्किट हाउस में ठहरे थे. अगले दिन प्रस्थान के समय वे अपना पर्स कमरे में भूल गये. पर्स में नकदी और जरूरी कागजात थे. जैसे ही यात्री परिसर से बाहर निकले, मोहन कुमार दौड़ते हुए पहुंचे और पर्स लौटा दिया. यात्रियों ने बताया कि मोहन कुमार ने खुद स्वीकार किया कि कई महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण वे आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं, बावजूद उन्होंने पर्स अपने पास रखने का विचार तक नहीं किया. इस ईमानदारी से प्रभावित होकर सर्वोदय मंडल ने उन्हें सम्मानित किया. सम्मान समारोह में प्रो मनोज कुमार ने कहा कि मोहन कुमार ने साबित किया है कि गांधी के नैतिक मूल्य आज भी आम जनमानस में जीवित हैं. मौके पर सर्किट हाउस के कर्मचारी और सामाजिक कार्यकर्ता भी मौजूद थे.

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