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Home झारखण्ड हजारीबाग हजारीबाग के चूरचू में हाथियों का कहर, एक ही परिवार के चार समेत छह की मौत

हजारीबाग के चूरचू में हाथियों का कहर, एक ही परिवार के चार समेत छह की मौत

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हजारीबाग के चूरचू में हाथियों का कहर, एक ही परिवार के चार समेत छह की मौत
हजारीबाग के चूरचू में हाथियों ने छह लोगों की जान ली.

हजारीबाग से जयनारायण प्रसाद की रिपोर्ट

Hazaribagh Elephant Attack: हजारीबाग जिले के चूरचू प्रखंड स्थित आंगो गोंदवार भुइया टोली गांव में गुरुवार देर रात जंगली हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया. हाथियों के हमले से एक परिवार के चार लोग समेत छह लोगों की मौत हो गई. मरने वाले में दो मासूम बच्चे भी शामिल हैं. घटना के बाद पूरे गांव में दहशत और मातम का माहौल बना है.

रात के दो बजे हाथियों ने मचाई तबाही

आंगो थाना प्रभारी जानू कुमार ने बताया कि रात करीब दो बजे पांच हाथियों का झुंड गांव में घुस आया. सबसे पहले हाथियों ने धनेश्वर राम (60 वर्ष) को सूंड से उठाकर सूरज राम के आंगन में फेंक दिया. धनेश्वर को बचाने के लिए जब सूरज राम का परिवार बाहर निकला, तो हाथियों ने उन्हें कुचल दिया.

हाथियों के हमले में छह की चली गई जान

हाथियों के हमले से मरने वालो में सूरज राम (60 वर्ष), मधु देवी (22 वर्ष), मधु देवी का डेढ़ वर्ष का बेटा और करीब चार वर्ष की बेटी शामिल हैं. इसके अलावा सुमन देवी (20 वर्ष) और धनेश्वर राम (60 वर्ष) की भी मौत हो गई. चार साल की बच्ची ने इलाज के दौरान शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दम तोड़ दिया. बताया जाता है कि सुमन देवी दो दिन पहले ही अपने ससुराल से मायके आई थी.

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मौके पर पहुंची वन विभाग और पुलिस की टीम

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. गांव में दहशत का माहौल है. वन विभाग की ओर से मरने वाले लोगों के परिजनों को मुआवजा देने की बात कही गई है. वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि मुआवजे की प्रक्रिया जल्द ही शुरू कर दी जाएगी. ग्रामीणों ने हाथियों के लगातार बढ़ते आतंक से निजात दिलाने की मांग की है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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