[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home झारखण्ड हजारीबाग उद्भव सिंचाई योजना बंद, पानी के लिए तरस रहे खेत

उद्भव सिंचाई योजना बंद, पानी के लिए तरस रहे खेत

0
उद्भव सिंचाई योजना बंद, पानी के लिए तरस रहे खेत

खेती के साधन ठप, फसल सिंचाई के लिए किसान हैं परेशान

संजय सागर, बड़कागांव

बड़कागांव में 42 वर्षों से उद्भव सिंचाई योजना बंद है. किसान नदियों, तालाबों, कुएं और बोरिंग के सहारे अपनी खेतीबारी करते हैं. गर्मी के दिनों में नदियां, तालाब, कुएं सूख जाते हैं. ऐसी स्थिति में किसानों को सिंचाई करने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ठाकुर मोहल्ला के ग्रामीण और बड़कागांव के किसानों ने बताया कि बड़कागांव में सिंचाई के लिए उद्भव सिंचाई योजना के तहत 1980 में उद्भव सिंचाई की स्थापना की गयी. उस समय लाखों रुपये खर्च कर कुएं, बिजली घर और विभिन्न गांव और खेतों तक पाइप लाइन बिछायी गयी थी. नाले का निर्माण किया गया था. यह योजना दो वर्ष तक सफल रही. वर्ष 1983 के बाद से यह योजना ठप हो गयी. तब से कोई पहल नहीं की गयी. धीरे-धीरे नाले भी खत्म हो गये. नाले को कई लोग अतिक्रमण कर लिए हैं. कई लोग घर बना लिए हैं. पानी टंकी भी गायब हो गयी. मशीन जंग खा गयी और जो बची न जाने मशीन कैसे गायब हो गयी. सिंचाई योजना बंद हो जाने के बाद भी किसानों ने खेती करना नहीं छोड़ा. अपनी मेहनत से वर्षा और नदियों के भरोसे खेती करते रहे. कई ऐसे किसान हैं जो स्वयं कुआं खोदकर आज भी खेती करते हैं.

इन गांव में सिंचाई भगवान भरोसे :

बड़कागांव के पीपल नदी, तरीवा नदी, झरिवा नदी के किनारे लगभग 75 एकड़ भूमि, चोरका, पंडरिया, महटिकरा, हरदरा नदी क्षेत्र में 75 एकड़ जमीन में खेती होती है. इसके अलावा बादमाही नदी, विश्रामपुर की नदी, मंझलाबाला नदी, सिरमा, छावनियां नदी के किनारे सैकड़ों एकड़ भूमि में खेती होती है. नदियों के सूख जाने के कारण फसल बर्बाद होने के कगार पर हैं.

खुद कुआं खोदकर कर रहे सिंचाई :

बड़कागांव मध्य पंचायत के अंसारी मुहल्ला निवासी मिट्ठू मियां ने बताया कि सरकार की ओर से कोई सिंचाई की सुविधा नहीं मिली. इस कारण कुआं खोदकर लाठ-कुंड़ी से खेत में पानी पटाते हैं. साढ़गडीह के निवासी अजय कुमार ने बताया कि सरकार की ओर से अब तक कोई सिंचाई का साधन उपलब्ध नहीं है. छोटे-छोटे तालाब बनवाकर केवल खानापूर्ति की जाती है. ग्रीष्म ऋतु में सभी तालाब सूख गये हैं. इससे खेती करने व जानवरों को पानी पिलाने में परेशानी हो रही है. कृषक सुखदेव महतो, सुरेश महतो, लखन महतो ने बड़कागांव में बंद पड़े सिंचाई योजना को शुरू करने की मांग की है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel