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हजारीबाग के बिहारी बालिका विद्यालय को क्लीन एंड ग्रीन स्कूल रैंकिंग में देश में 21वां स्थान

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हजारीबाग के बिहारी बालिका विद्यालय को क्लीन एंड ग्रीन स्कूल रैंकिंग में देश में 21वां स्थान
हजारीबाग के बाड़म स्थित बिहारी बालिक विद्यालय. फोटो: प्रभात खबर

हजारीबाग से आरिफ की रिपोर्ट

Hazaribagh News: केंद्रीय स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से आयोजित स्वच्छ एवं हरित विद्यालय पुरस्कार (एसएचवीआर) 2025-26 में हजारीबाग के बिहारी बालिका उच्च विद्यालय ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है. शहर के बड़म बाजार स्थित इस विद्यालय को अर्बन कैटेगरी-टू में देशभर में 21वां स्थान प्राप्त हुआ है. इस उपलब्धि के साथ विद्यालय को मानक प्रमाण-पत्र और एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी. यह उपलब्धि न सिर्फ विद्यालय, बल्कि पूरे जिले के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है.

34 मापदंडों पर खरा उतरा विद्यालय

स्वच्छ एवं हरित विद्यालय पुरस्कार के लिए निर्धारित विभिन्न मानकों पर बिहारी बालिका उच्च विद्यालय ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया. विद्यालय ने कुल 34 अलग-अलग मापदंडों को सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसके आधार पर उसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान के लिए चुना गया. प्रभारी प्रधानाध्यापिका रूपा वर्मा ने कहा कि यह पूरे विद्यालय परिवार के लिए गौरव का क्षण है. उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय शिक्षकों, शिक्षकेतर कर्मचारियों, छात्राओं और अभिभावकों के सामूहिक सहयोग को दिया.

दूसरे राज्यों के स्कूलों के लिए बनेगा मॉडल

रूपा वर्मा ने बताया कि विद्यालय के बेहतर कार्यों को देखते हुए उन्हें मॉडल के रूप में देश के अन्य राज्यों के स्कूलों में आमंत्रित किया जाएगा. वहां विद्यालय में अपनाई गई व्यवस्थाओं और नवाचारों को साझा किया जाएगा, ताकि दूसरे विद्यालय भी इससे प्रेरणा लेकर अपने परिसरों को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बना सकें. कभी-कभी सरकारी स्कूलों की खबरें सिर्फ समस्याओं की नहीं, बल्कि उपलब्धियों की भी होती हैं. और यह बात व्यवस्था को लेकर हमेशा शिकायत करने वालों के लिए एक उपयोगी याद दिलाने जैसा है.

झारखंड के 30 स्कूलों में से तीन को मिली सफलता

स्वच्छ एवं हरित विद्यालय पुरस्कार के लिए झारखंड से 30 विद्यालयों का चयन प्रारंभिक सूची में किया गया था. इनमें से केवल तीन विद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर स्थान बनाने में सफल रहे. इनमें हजारीबाग का बिहारी बालिका उच्च विद्यालय भी शामिल है. देशभर में 21वां स्थान प्राप्त कर विद्यालय ने झारखंड का नाम रोशन किया है. इस उपलब्धि को शिक्षा क्षेत्र में जिले की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है.

प्लस टू का दर्जा मिलने की भी उम्मीद

विद्यालय प्रशासन को उम्मीद है कि जल्द ही बिहारी बालिका उच्च विद्यालय को प्लस टू का दर्जा भी मिल सकता है. इसके लिए शिक्षा विभाग के स्तर पर आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. वर्तमान में विद्यालय में 225 से अधिक छात्राएं अध्ययनरत हैं. विद्यालय में नौ शिक्षक और तीन शिक्षकेतर कर्मचारी कार्यरत हैं, जो शैक्षणिक और अन्य गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं.

आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है परिसर

साल 1960 में स्थापित बड़म बाजार स्थित यह विद्यालय लगभग 2.5 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है. यहां छात्राओं के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था की गई है. परिसर में हैंडवॉश यूनिट और आठ शौचालय उपलब्ध हैं. विद्यालय परिसर में बागवानी की गई है, जिसमें कई औषधीय पौधे लगाए गए हैं. साथ ही एक इको पार्क भी विकसित किया गया है, जहां बैठने की व्यवस्था है. दीवारों और चारदीवारी पर शिक्षा, स्वच्छता और सोहराय कला से जुड़े आकर्षक चित्र और स्लोगन बनाए गए हैं.

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कबाड़ से जुगाड़ का अनोखा प्रयोग

विद्यालय में कचरा प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया है. एमजीएम लैब की सुविधा के साथ-साथ कबाड़ से जुगाड़ की अवधारणा को अपनाकर परिसर को आकर्षक और उपयोगी बनाया गया है. प्रभारी प्रधानाध्यापिका रूपा वर्मा ने बताया कि बेकार सामग्री का रचनात्मक उपयोग कर विद्यालय को सुसज्जित किया गया है. यही कारण है कि स्वच्छता, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विद्यालय ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशेष पहचान बनाई है. विद्यालय की यह उपलब्धि जिले के अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है और यह संदेश दे रही है कि सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतर सोच और सामूहिक प्रयास से राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता हासिल की जा सकती है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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