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Home झारखण्ड गुमला गुमला में अब नहीं होगी ब्लड की कमी, सदर अस्पताल ब्लड सेंटर को मिला नया लाइसेंस

गुमला में अब नहीं होगी ब्लड की कमी, सदर अस्पताल ब्लड सेंटर को मिला नया लाइसेंस

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गुमला में अब नहीं होगी ब्लड की कमी, सदर अस्पताल ब्लड सेंटर को मिला नया लाइसेंस
गुमला का सदर अस्पताल.

गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट

Gumla News: गुमला जिले के लोगों के लिए राहत भरी खबर है. लंबे इंतजार के बाद सदर अस्पताल स्थित ब्लड सेंटर को नया लाइसेंस (अनुज्ञप्ति) मिल गया है. इसके साथ ही जिले में रक्त की उपलब्धता को लेकर बनी गंभीर समस्या के समाधान का रास्ता साफ हो गया है. गुरुवार को उपायुक्त ने विशेष प्रेस वार्ता कर इसकी जानकारी दी. इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी, अस्पताल उपाधीक्षक (डीएस) डॉ. अनुपम किशोर और ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. सुनील राम भी मौजूद रहे. उपायुक्त ने कहा कि ब्लड सेंटर को नया लाइसेंस मिलना जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी उपलब्धि है. अब रक्त का स्थानीय स्तर पर सुरक्षित भंडारण और जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपलब्ध कराना संभव हो सकेगा.

2022 में लाइसेंस समाप्त होने के बाद बढ़ी थी परेशानी

उपायुक्त ने बताया कि गुमला सदर अस्पताल का ब्लड सेंटर वर्ष 2018 से संचालित हो रहा था. वर्ष 2022 में लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं होने के कारण इसकी अनुज्ञप्ति समाप्त हो गई थी. इसके बावजूद मरीजों की जरूरत को देखते हुए सीमित व्यवस्था के तहत कार्य जारी रखा गया. हालांकि, 27 नवंबर 2025 को चाईबासा में हुई एक घटना के बाद नियमानुसार ब्लड सेंटर का संचालन पूरी तरह बंद करना पड़ा. इसके बाद जिले में रक्त की उपलब्धता गंभीर चुनौती बन गई और मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा.

लगातार प्रयास के बाद मिला नया लाइसेंस

ब्लड सेंटर बंद होने के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने नए लाइसेंस के लिए आवेदन किया. सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करने में समय लगा, लेकिन लगातार प्रयासों के बाद करीब छह से सात महीने में ब्लड सेंटर को नई अनुज्ञप्ति मिल गई. उपायुक्त ने कहा कि इस उपलब्धि से अब जिले में रक्त संग्रहण, सुरक्षित भंडारण और वितरण की व्यवस्था फिर से सुचारु रूप से शुरू हो सकेगी. इससे मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में काफी आसानी होगी.

सिकल सेल और थैलेसीमिया मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

उपायुक्त ने बताया कि ब्लड सेंटर बंद रहने के दौरान सबसे अधिक परेशानी सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया से पीड़ित लगभग 250 मरीजों को हुई. इन मरीजों को नियमित अंतराल पर रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है. स्थानीय स्तर पर पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण कई बार समय पर रक्त उपलब्ध नहीं हो पाता था. अब नया लाइसेंस मिलने के बाद इन मरीजों को काफी राहत मिलेगी और नियमित रूप से आवश्यक रक्त उपलब्ध कराया जा सकेगा.

अब स्थानीय स्तर पर होगा रक्त का भंडारण और वितरण

पूर्व में जिले में एकत्र किए गए रक्त को रिम्स भेजा जाता था और आवश्यकता पड़ने पर वहीं से रक्त वापस उपलब्ध कराया जाता था. इस प्रक्रिया में जितना रक्त भेजा जाता था, उसकी तुलना में कम मात्रा में रक्त वापस मिल पाता था. इससे जिले की मांग पूरी करना मुश्किल हो जाता था. अब नए लाइसेंस के बाद गुमला में संग्रहित रक्त का स्थानीय स्तर पर ही सुरक्षित भंडारण और वितरण किया जाएगा. इससे रक्त की उपलब्धता बेहतर होगी और जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त मिल सकेगा.

नियमित रक्तदान शिविर लगाने का निर्देश

उपायुक्त ने सिविल सर्जन को जिले में नियमित रूप से रक्तदान शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि आगामी 13 जुलाई को जिला समन्वय समिति की बैठक के दौरान समाहरणालय परिसर में भी रक्तदान शिविर लगाया जाएगा. इसके अलावा सभी प्रखंडों और अंचलों में बड़े स्तर पर रक्तदान शिविर आयोजित कर अधिक से अधिक रक्त संग्रह करने की योजना बनाई गई है. प्रशासन का उद्देश्य जिले को रक्त के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है.

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अब बिना डोनर भी मिलेगा ब्लड

सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी ने कहा कि गुमला जिला एक बार फिर रक्त उपलब्धता के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. उन्होंने विश्वास जताया कि जिले में पर्याप्त संख्या में नियमित रक्तदाता मौजूद हैं और अब मरीजों को रक्त के लिए दूसरे जिलों या संस्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. उन्होंने आम लोगों से स्वैच्छिक रक्तदान करने की अपील भी की. साथ ही एक महत्वपूर्ण बदलाव की जानकारी देते हुए बताया कि पहले किसी मरीज को रक्त लेने के लिए अपने साथ एक डोनर लाना अनिवार्य होता था, ताकि “ब्लड के बदले ब्लड” की व्यवस्था लागू रहे. अब यह नियम लागू नहीं रहेगा. जरूरतमंद मरीजों को बिना डोनर लाए भी रक्त उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिलेगी.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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