[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home झारखण्ड गुमला विशेष : 43 वर्ष का हुआ गुमला जिला, नक्सल खत्म हुआ, लेकिन भ्रष्टाचार विकास में बाधक

विशेष : 43 वर्ष का हुआ गुमला जिला, नक्सल खत्म हुआ, लेकिन भ्रष्टाचार विकास में बाधक

0
विशेष : 43 वर्ष का हुआ गुमला जिला, नक्सल खत्म हुआ, लेकिन भ्रष्टाचार विकास में बाधक

गुमला को जिला का दर्जा 18 मई 1983 ईस्वी को मिला था. : पर्यटक स्थलों का विकास हो तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर खुलेंगे.

दुर्जय पासवान, गुमला

आज, हमारा गुमला जिला 43 साल का हो गया. आज ही के दिन 1983 को गुमला को जिला का दर्जा मिला था. गुमला जिले में कुछ अपवाद बातों को छोड़ दें तो निरंतर कुछ नया हो रहा है. लेकिन भ्रष्टाचार विकास में बाधक है. हालांकि, गुमला जिला नक्सल से मुक्त हो गया है. पहले नक्सल के कारण गांवों का विकास रुका हुआ था. अब तक नक्सल खत्म हुआ, तो भ्रष्टाचार विकास में बाधक बन गया है. भ्रष्टाचार के अलावा साइबर क्राइम, नशापान व अंधविश्वास जिले के विकास में बाधक है. गुमला के विकास के लिए सरकार करोड़ों रुपये दे रही है. लेकिन एक टेबल से दूसरे टेबल होते हुए पब्लिक तक विकास का पैसा पहुंचने में देरी हो रही है. टेबल दर टेबल बढ़ने में विकास का आधा पैसा खत्म हो जा रहा है. ऐसे, गुमला में सरकार की कई योजनाओं को धरातल में उतारा गया है. जिसका फल है- गुमला को पीएम अवार्ड मिल चुका है. गुमला में नित्य नये काम हो रहे हैं. ऐसे, मनुष्य के जीवन में उतार चढ़ाव एक निरंतर प्रक्रिया है. इसी प्रक्रिया का एक अंग अपना गुमला जिला रहा है. जो कई उतार चढ़ाव के बाद आज हम आगे बढ़ रहे हैं. जरूर कुछ स्थानों पर हम पीछे हैं. फिर भी वर्तमान में गुमला जिला की जो स्थिति है. पहले की भांति बेहतर है. प्रयास सभी का है. हम आगे बढ़ रहे हैं.

18 मई यानि आज. गुमला का जिला स्थापना दिवस है. कई चुनौतियों का सामना करते हुए आज गुमला 43 साल का हो गया. यानि पूरी तरह समझदार व परिपक्व गुमला.

गुमला में धार्मिक, पर्यटक व ऐतिहासिक स्थल भरे पड़े हैं

झारखंड राज्य के अंतिम छोर में बसे गुमला जिले का इतिहास गौरवपूर्ण है. भ्रष्टाचार, नशापान, अंधविश्वास से जूझ रहे गुमला में सभी जाति व धर्म के लोग रहते हैं. यह आदिवासी बहुल जिला है. उरांव जनजाति की जनसंख्या अधिक है. इसाईयों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है. यह श्रीराम भक्त हनुमान की जन्मस्थली है. गुमला में पग पग पर धार्मिक व ऐतिहासिक स्थल है. दक्षिणी कोयल व शंख नदी गुमला से होकर बहती है. धार्मिक आस्था के केंद्र टांगीनाथ धाम, देवाकीधाम, महामाया मंदिर, वासुदेव कोना मंदिर है. रमणीय पंपापुर, नागफेनी, बाघमुंडा, हीरादह गुमला जिले की पहचान है. ऐतिहासिक धरोहर डोइसागढ़ है. गुमला धर्मप्रांत में 41 चर्च है. कई चर्च पुराने हैं जो अपने अंदर प्राचीन इतिहास समेटे हुए है. अंग्रेजों को धूल चटाने वाले बख्तर साय, मुंडन सिंह, तेलंगा खड़िया व जतरा टाना भगत जैसे वीर सैनानियों की जन्म भूमि है. परमवीर चक्र विजेता शहीद अलबर्ट एक्का जैसे वीर सपूत इसी गुमला के जारी प्रखंड की धरती पर जन्म लिये. गुमला शहीदों की भूमि है. गुमला के प्रमुख धार्मिक, पर्यटक व ऐतिहासिक स्थलों को बढ़ावा मिले तो स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा. खेल के क्षेत्र में निरंतर बढ़ते गुमला की धरती से कई राज्य व राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों का जन्म हुआ है. बस अब बुलंदियों को छूने की आशा है और यह तभी संभव है. जब हम सब मिलकर एक सोच, नये उत्साह, उमंग, जोश से आगे बढ़ेंगे.

गुमला जिले का इतिहास गौरवपूर्ण है

इतिहास पर गौर करें तो खनिज संपदाओं से परिपूर्ण गुमला 18 मई 1983 ई को रांची से अलग होकर जिला बना. गुमला जिला 5327 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है. कुल जनसंख्या 1246249 है. जिसमें पुरुषों की जनसंख्या 625292 व महिला जनसंख्या 620957 है. लिंगानुपात 993 प्रति हजार पुरुष है. गुमला जिले में 12 प्रखंड और तीन अनुमंडल गुमला, चैनपुर व बसिया है. पंचायतों की संख्या 159 है. राजस्व गांव 952 है. दो राजस्व गांव बेचिरागी है. गुमला शहरी क्षेत्र में एक नगर परिषद है. जिसकी आबादी 51307 है. जिले में कृषि योग्य भूमि 3.296 लाख व वन क्षेत्र 1.356 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है. खनिज के रूप में बॉक्साइड है. परंतु कारखाना नहीं है. जबकि, लंबे समय से गुमला में अल्युमिनियम कारखाना की स्थापना की मांग उठ रही है. गुमला गांवों में बसा है. यहां के लोग जीविका के लिए खेतीबारी, घेरलू उद्योग धंधे व मजदूरी करते हैं. गुमला के बगल में लोहरदगा, सिमडेगा, रांची व लातेहार जिला का बॉर्डर सटता है. यह छत्तीसगढ़ व ओड़िशा राज्य का प्रवेश द्वार है. पलायन, गरीबी, अशिक्षा, सिंचाई, बेरोजगारी जैसी कई चुनौतियों का सामना करते हुए गुमला आगे बढ़ रहा है. लेकिन गुमला के कुछ हालात ऐसे हैं. जिसे बदलना है. जरूरत है, हम सभी के अच्छे सोच की. जिससे गुमला झारखंड ही नहीं पूरे देश में मॉडल जिला बन सके. प्लानिंग के तहत काम हो तो गुमला के लोग अच्छे हैं जो हर समय विकास में सहयोग करते हैं. परंतु, कथित तौर पर कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के कारण गुमला का विकास पर असर पड़ते रहा है. यहां कमीशनखोरी है. जिसका सीधा असर विकास के काम पर पड़ रहा है.

गुमला की आबादी धर्म के अनुसार

धर्म आबादी

हिंदू 376305

मुस्लिम 62517

इसाई 246097

सिख 269

बौद्ध 645

जैन 28

अघोषित 4290

अन्य 556098

कुल 1246249

गुमला जिला एक नजर में

प्रखंड : 12

अनुमंडल : 03

पंचायत : 159

गांव : 952

थाना : 18

नगर परिषद : 01

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel