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Home झारखण्ड गुमला कहीं छाई है हरियाली, तो कहीं पकने लगे हैं धान

कहीं छाई है हरियाली, तो कहीं पकने लगे हैं धान

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कहीं छाई है हरियाली, तो कहीं पकने लगे हैं धान

गुमला. खेत फसलों से लहलहा रहे हैं. कहीं हरियाली छायी है, तो कहीं पीलापन पड़ने लगा है. यह पीलापन इस बात का संकेत है कि फसल अब पकने लगे हैं. हम बात कर रहे हैं जिले की प्रमुख फसल धान की. इस साल खरीफ मौसम में 99 प्रतिशत धान की खेती हुई. हर साल की भांति इस साल भी जिले में 1.88 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान आच्छादन का लक्ष्य था, जिसके विरुद्ध जिले भर में 185217 हेक्टेयर भूमि पर खेती हुई है, जिसमें 149405 हेक्टेयर भूमि पर रोपा विधि व 35812 हेक्टेयर भूमि पर छींटा विधि से खेती हुई है. धान के इस आच्छादन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किसानों को परेशानी उठानी पड़ी. इस साल मॉनसून आगमन से पूर्व जिले में बारिश का दौर शुरू हो गया था. आये दिन बारिश के बीच कहीं किसानों को धान का बिचड़ा तैयार करने की चुनौती. तो कहीं बिचड़ा बचाने की चुनौती का सामना करना पड़ा. भारी बारिश के बाद खेतों में पानी भरा, तो उसे खाली करने की परेशानी का सामना करना पड़ा. इन चुनौतियों का सामना करते हुए किसान आगे बढ़ें, तो उर्वरक की कालाबाजरी का दंश झेलना पड़ा और अंतत: किसानों की मेहनत रंग लायी और अब हर खेत में हरियाली छाई है.

बारिश से खरीफ फसलों की खेती प्रभावित

इस साल भारी बारिश से जिले में खरीफ के अन्य फसलों की खेती प्रभावित हुई. विशेषकर मूंग, तिल व अन्य दलहन की खेती प्रभावित हुई. खरीफ मौसम में खरीफ की विभिन्न फसलों के आच्छादन का लक्ष्य तय किया जाता है. इस साल मूंग 1500 हेक्टेयर भूमि, तिल 100 हेक्टेयर भूमि व अन्य दलहन 2200 हेक्टेयर भूमि पर आच्छादन का लक्ष्य था. इसके विरुद्ध मूंग मात्र 258 हेक्टेयर भूमि, तिल 31 हेक्टेयर व अन्य दलहन 593 हेक्टेयर भूमि पर खेती हो सकी. वहीं खरीफ की अन्य फसल मक्का 8100 के विरुद्ध 7053 हेक्टेयर, मड़ुआ 10 हजार के विरुद्ध 8493, अरहर 16 हजार के विरुद्ध 12842, उरद आठ हजार के विरुद्ध 6315, कुल्थी 2500 के विरुद्ध 1576, मूंगफली पांच हजार के विरुद्ध 4648 व सरगुजा 1500 हेक्टेयर के विरुद्ध 1123 हेक्टेयर भूमि पर खेती की जा सकी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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