दुर्जय पासवान की रिपोर्ट
Gumla Road Construction: झारखंड के गुमला जिले में स्थित पालकोट प्रखंड के बागेसेरा पंचायत अंतर्गत डुमरडीह गांव के ग्रामीणों ने सरकारी तंत्र की बेरुखी से तंग आकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है. गांव आने-जाने के लिए सड़क न होने से परेशान ग्रामीणों ने आपसी सहयोग और श्रमदान के जरिए कच्ची सड़क पर मोरम मिट्टी डालकर उसे आवागमन के योग्य बना दिया है.
ग्रामीणों की गुहार अनसुनी, आपात स्थिति में बढ़ी मुश्किलें
इस संबंध में डुमरडीह के ग्रामीणों ने बताया कि वे पूर्व में उपायुक्त (डीसी) कार्यालय को लिखित आवेदन देकर अपने गांव के लिए सड़क निर्माण की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. ग्रामीणों के अनुसार, सड़क न होने से सबसे बड़ी समस्या तब खड़ी होती है जब गांव में कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाता है या किसी को सांप काट लेता है. ऐसी आपातकालीन स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है.
ग्रामीणों ने श्रमदान से बनाई सड़क
इसके अलावा, उबड़-खाबड़ और दलदली रास्तों के कारण गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए चिकित्सालय ले जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. गौरतलब है कि इस क्षेत्र की करीब तीन हजार की आबादी, जिसमें डुमरडीह, मानाबीरा, कटरडांड़ और नवाडीह आदि गांव शामिल हैं, जहां रहने वाले लोगों को बरसात के दिनों में टापू जैसे हालात का सामना करना पड़ता है. इसी नारकीय स्थिति से निजात पाने के लिए सभी ग्रामीणों ने एकजुट होकर खुद ही रास्ता दुरुस्त करने का फैसला किया. श्रमदान से सड़क सुधरने के बाद अब लोगों को आने-जाने में थोड़ी राहत मिलेगी, हालांकि ग्रामीणों ने प्रशासन से अब भी इस मार्ग के स्थायी पक्कीकरण की मांग की है.
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