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Home झारखण्ड गुमला धर्म को समाप्त करते हैं ईर्ष्या, द्वेष व क्रोध

धर्म को समाप्त करते हैं ईर्ष्या, द्वेष व क्रोध

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धर्म को समाप्त करते हैं ईर्ष्या, द्वेष व क्रोध

गुमला. दिव्य ज्योति जागृति संस्थान गुमला आश्रम में मंगलवार को गुरु पूर्णिमा का दिव्य उत्सव मनाया गया. मौके पर सद्गुरु सर्वश्री आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी अमृता भारती, स्वामी धनंजया नंदजी ने गुरु महिमा पर विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि सत्संग विचारों व भजनों के माध्यम से समझाया गया कि भगवान वेदव्यास के अवतरण का दिवस गुरु पूर्णिमा जीवन को पूर्णता की ओर बढ़ाने वाले सद्गुरु के प्रति आभार प्रकट करने का दिवस है. कहा कि ईर्ष्या-द्वेष, क्रोध, वैमनस्य आदि अवगुण धर्म को समाप्त करते हैं. उन्हीं अवगुणों का विनाश करने के लिए संत महापुरुष मानव को ईश्वरीय प्रकाश से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं. क्योंकि जब तक आप ईश्वरीय प्रकाश से नहीं जुड़ेंगे, तब तक अवगुणों का अंधकार समाप्त नहीं हो सकता है. दिव्य गुरु आशुतोष महाराज का कहना है कि ब्रह्मज्ञान की वर्षा ही मानव के कलुषित मन को धोकर पाश्विकता में सने समाज को रहने योग्य बना सकती है. ब्रह्म ज्ञान अर्थात ईश्वर का साक्षात दर्शन कर मानव के मन को परिवर्तित किया जा रहा है. साथ ही दिव्य गुरुदेव की कृपा से अनेक सामाजिक प्रकल्पों द्वारा समाज में परिवर्तन हो रहा है. हमें भी इसमें अपना पूरा सहयोग देना है. मौके पर गायक गोपाल, गायिका लक्ष्मी, शोभा व प्रीति भारती ने सुमधुर भजनों द्वारा गुरु महिमा का गायन किया. जिनका तबले पर पप्पू व पैड पर अभिषेक ने संगत दिया.

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