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बुढ़वा महादेव मंदिर में हैं श्रद्धालुओं की गहरी आस्था

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बुढ़वा महादेव मंदिर में हैं श्रद्धालुओं की गहरी आस्था

गुमला. शहर के करमटोली स्थित बुढ़वा महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है. हिमांशु केशरी ने बताया कि महाशिवरात्रि, श्रावण माह, नवरात्रि समेत अन्य धार्मिक अवसरों पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है. मान्यता है कि यहां भगवान शिव स्वयं पीपल के पेड़ के खोह में शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे. प्राचीन काल में गांव के बैगा को स्वप्न आया कि महादेव पीपल वृक्ष में उत्पन्न हुए हैं. प्रातः जब ग्रामीणों ने उक्त स्थान पर जाकर देखा, तो स्वप्न सही साबित हुआ. इसके बाद गांव के लोगों ने वहां विधिवत पूजा-अर्चना शुरू करने का संकल्प लिया. बैगा व ग्रामीणों ने इस संबंध में तेलगांव पंचायत के तत्कालीन मुखिया बालक राम तथा जिला मुख्यालय के मेन रोड निवासी स्वर्गीय मुरारी प्रसाद केशरी (हरिओम केशरी के पिता) को जानकारी दी. सूचना मिलते मुरारी प्रसाद केशरी अपने मित्र तेजपाल साबू के साथ स्थल पर पहुंचे. स्वयंभू शिवलिंग की चर्चा तेजी से फैलने लगी, किंतु उस समय वहां पूजा के लिए मंदिर, जल समेत अन्य आवश्यक सुविधाओं का अभाव था. इसके बाद मुरारी प्रसाद केशरी ने अपने निजी खर्च से तथा तेजपाल साबू, गौरीशंकर साहू एवं ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर का निर्माण कराया. उन्होंने जलाभिषेक के लिए एक कुएं का निर्माण, मंदिर तक पहुंचने के लिए मुख्य पथ का निर्माण तथा मंदिर के नाम पर एक एकड़ 35 डिसमिल भूमि दान स्वरूप प्रदान की. उनकी आस्था इतनी गहरी थी कि लंबे समय तक हर महाशिवरात्रि व श्रावण माह में मंदिर की साफ-सफाई, पूजा-पाठ एवं प्रसाद की व्यवस्था का खर्च भी स्वयं वहन करते रहे. वर्तमान में मंदिर समिति में अध्यक्ष विनय गुप्ता, उपाध्यक्ष शिव कुमार गुप्ता, कोषाध्यक्ष मनोज गुप्ता के अलावा राजकुमार गुप्ता, दीपक गुप्ता, विजय गुप्ता, सुखदेव, राजेश सिंह समेत अन्य सदस्य सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं.

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