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वोट बहिष्कार का लिया निर्णय

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वोट बहिष्कार का लिया निर्णय

बिशुनपुर.

बिशुनपुर प्रखंड के पूर्वी पठार क्षेत्र के लगभग आधा दर्जन गांवों के चार बूथ के वोटरों ने सड़क नहीं बनने के कारण रविवार को बैठक कर वोट बहिष्कार का निर्णय लिया. बैठक हाड़ुप रिसापाठ उपस्वास्थ्य केंद्र के समीप ग्राम प्रधान ननकू खेरवार की अध्यक्षता में हुई. ग्रामीणों ने कहा कि आजादी के 76 वर्ष बीत जाने के बाद भी लोग बुनियादी सुविधा से वंचित हैं. वर्षों से प्रखंड मुख्यालय से हाड़ुप होते हुए चीरोपाठ, इटकिरी से रिसापाठ एवं हिसीर से बेथड तक सड़क निर्माण की मांग करते आ रहे हैं. इसे लेकर कई बार प्रखंड कार्यालय, जिला कार्यालय एवं वन विभाग को ज्ञापन सौंपा गया, फिर भी अब तक सड़क का निर्माण नहीं हो सका है. जिससे लोगों को प्रखंड मुख्यालय तक जाने में काफी कठिनाई होती है. जब कोई बीमार पड़ता है, तो उसे खाट पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिशुनपुर ले जाया जाता है, ऐेसे में कई बार मरीज की जान भी चली जाती है. गर्भवती महिलाओं को तो काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. सड़क के अभाव में गांव के बच्चे स्कूल तक नहीं पहुंच पाते हैं. मौके पर रामलाल उरांव, राजबली भगत, पुरण भगत, बसंत उरांव, मंगरु खेरवार, बुद्धेश्वर उरांव, मंजू देवी सहित अन्य उपस्थित थे.

नेताओं के गांव में घुसने पर रोकग्रामीणों ने गांव में राजनीतिक दल के नेताओं के घुसने पर रोक लगा दी है. चेतावनी देते हुए कहा है कि सिर्फ चुनाव के दौरान नेता वोट मांगने गांव में आते हैं अौर चिकनी-चुपड़ी बात बनाकर वोट ले लेते हैं. अब कोई नेता वोट मांगने के उद्देश्य से गांव आयेगा, तो उसे पकड़कर पूछा जायेगा कि आज तक गांव में सड़क क्यों नहीं बनी. अगर नेताओं द्वारा गुमराह करने का प्रयास किया गया, तो उन्हें बंधक बनाने का भी काम किया जायेगा.

पंचायत प्रतिनिधियों को सुनायी खरी खोटीवोट बहिष्कार की सूचना मिलने के बाद सेरका पंचायत के कई पंचायत प्रतिनिधि बैठक में पहुंचे. ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया कि वोट देना उनका अधिकार है. वह काम करने वाले प्रतिनिधि का चयन करें. इस पर गांव के लोग आक्रोशित हो गये और जनप्रतिनिधियों को भी जमकर खरी-खोटी सुनायी.

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