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अनुसंधान अगर दुरुस्त होगा तो परिणाम भी बेहतर आयेगा

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अनुसंधान अगर दुरुस्त होगा तो परिणाम भी बेहतर आयेगा

गोड्डा कोर्ट. झालसा के निर्देश पर डालसा की ओर से शनिवार को व्यवहार न्यायालय के लाइब्रेरी सभागार में जिला स्तरीय मल्टी स्टेक होल्डर्स कंसल्टेशन कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस दौरान पीड़ित बच्चों को न्याय सुलभ कराने को लेकर पॉक्साे एक्ट एवं जुबिनाइल जस्टिस के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गयी. शुभारंभ डालसा अध्यक्ष सह पीडीजे रमेश कुमार, डीजे प्रथम कुमार पवन, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सुशील कुमार झा, महासचिव योगेश चंद्र झा, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डाॅ तारा शंकर झा, डाॅ निर्मला बेसरा, जेजे बार्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट मुक्ति भगत ने शुभारंभ किया. संचालन अधिवक्ता सह मीडिएटर नूतन तिवारी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डालसा सचिव दीपक कुमार ने किया. पीडीजे रमेश कुमार ने कहा कि अनुसंधान अगर दुरुस्त होगा तो परिणाम भी बेहतर आयेगा. समाज में अगर इस प्रकार की घटना होती है, तो इस संबंध में त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए. पॉक्सो का कहीं गलत उपयोग नहीं हो. झूठा व गलत मुकदमा न हो, इसलिए पूरी जिम्मेवारी से आइओ इसका अनुसंधान करें. किसी विक्टिम को थाने में बुलाने की कोशिश न करें. पीड़िता का नाम उजागर नहीं हो. इसपर ध्यान देने की जरूरत है. न्याय संगत कार्य करने की जरूरत है. गवाहों को समय पर न्यायालय के समक्ष उपस्थित करायें. ताकि समय सीमा के अंदर मामले का निबटारा सुनिश्चित हो. छात्राओं को भी इस संबंध में जानकारी देने का आह्वान किया गया. पॉक्सो व जुबिनाइल जस्टिस में पीड़िता को न्याय सुलभ कराने को लेकर मल्टी स्टेक होल्डर के रूप में पीड़ित या पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पुलिस, बाल कल्याण समिति, चिकित्सा पदाधिकारी, लोक अभियोजक, अधिवक्ता आदि की भूमिका अहम है. गोड्डा कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की वार्डन स्नेहलता पाठक, पुलिस पदाधिकारी, मध्यस्थ, न्यायायिक पदाधिकारियों ने आदि ने भी परिचर्चा के माध्यम से अनुसंधानकर्ता को दायित्व बोध कराया गया. मौके पर मिडिएटर सह अधिवक्ता धर्मेंद्र नारायण, एलएडीसी सदस्य, थाना के इंस्पेक्टर, प्रभारी, आइओ, चिकित्सा पदाधिकारी, बाल कल्याण समिति, बाल संरक्षण इकाई, विधि सह प्रतिरक्षण पदाधिकारी, समाज कल्याण विभाग के पदाधिकारी व कर्मी, पीएलवी, बैंक अधिकारी उपस्थित थे.

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