भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही प्रखंड क्षेत्र के कई गांवों में पेयजल संकट गंभीर रूप लेने लगा है. ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार द्वारा लाखों रुपये की लागत से स्थापित की गयीं सोलर जलमीनारें अब प्रशासनिक उपेक्षा और रखरखाव के अभाव में निष्प्रयोज्य साबित हो रही हैं. जिन योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीणों को शुद्ध एवं फिल्टरयुक्त पानी उपलब्ध कराना था, वे अब धरातल पर विफल होती नजर आ रही हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में 15वें वित्त आयोग की राशि से प्रत्येक पंचायत में लाखों रुपये खर्च कर सोलर जलमीनारें स्थापित की गयी थीं. लेकिन रखरखाव की कमी के कारण ये सभी जलमीनारें वर्तमान में बंद पड़ी हैं. स्थिति यह है कि जिन चापानलों के ऊपर इन जलमीनारों का निर्माण किया गया था, वे भी खराब हो चुके हैं. कई बार मरम्मत के बाद भी चापानल कुछ ही दिनों में फिर से ठप हो जाते हैं, जिससे ग्रामीणों को सामान्य पेयजल तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है.