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Home झारखण्ड गोड्डा मेहरमा में पेयजल संकट गहराया, सोलर जलमीनारें बनीं शोभा की वस्तु

मेहरमा में पेयजल संकट गहराया, सोलर जलमीनारें बनीं शोभा की वस्तु

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मेहरमा में पेयजल संकट गहराया, सोलर जलमीनारें बनीं शोभा की वस्तु

भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही प्रखंड क्षेत्र के कई गांवों में पेयजल संकट गंभीर रूप लेने लगा है. ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार द्वारा लाखों रुपये की लागत से स्थापित की गयीं सोलर जलमीनारें अब प्रशासनिक उपेक्षा और रखरखाव के अभाव में निष्प्रयोज्य साबित हो रही हैं. जिन योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीणों को शुद्ध एवं फिल्टरयुक्त पानी उपलब्ध कराना था, वे अब धरातल पर विफल होती नजर आ रही हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में 15वें वित्त आयोग की राशि से प्रत्येक पंचायत में लाखों रुपये खर्च कर सोलर जलमीनारें स्थापित की गयी थीं. लेकिन रखरखाव की कमी के कारण ये सभी जलमीनारें वर्तमान में बंद पड़ी हैं. स्थिति यह है कि जिन चापानलों के ऊपर इन जलमीनारों का निर्माण किया गया था, वे भी खराब हो चुके हैं. कई बार मरम्मत के बाद भी चापानल कुछ ही दिनों में फिर से ठप हो जाते हैं, जिससे ग्रामीणों को सामान्य पेयजल तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है.

दासुचकला गांव में डेढ़ वर्ष से जलसंकट

सुड़नी पंचायत के दासुचकला गांव में स्थिति और भी गंभीर है. यहां गांव के बाहर स्थापित सोलर जलमीनार पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ी है. लंबे समय से मरम्मत नहीं होने के कारण यह योजना पूरी तरह निष्क्रिय हो चुकी है. ग्रामीणों के अनुसार, कभी यह जलमीनार दर्जनों परिवारों की पेयजल आवश्यकता पूरी करती थी, लेकिन अब यह केवल एक शोभा की वस्तु बनकर रह गयी है.

ग्रामीणों को करना पड़ रहा परेशानी का सामना

जलमीनार के बंद होने से ग्रामीणों को दूर-दराज के चापानलों से पानी लाने या फिर महंगे डिब्बाबंद पानी पर निर्भर रहने को मजबूर होना पड़ रहा है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह स्थिति अत्यंत कठिन और कष्टदायक बन गयी है. इस समस्या को लेकर स्थानीय ग्रामीण निर्मल कुजूर, राजेश कुजूर, विलास कुजूर, संजय कुजूर, राजा कुजूर एवं मनोहर लकड़ा सहित दर्जनों लोगों ने नाराजगी जतायी है. उन्होंने वरीय अधिकारियों से मांग की है कि बंद पड़ी सोलर जलमीनार की शीघ्र मरम्मत करायी जाये, ताकि भीषण गर्मी में ग्रामीणों को पेयजल संकट से राहत मिल सके.

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