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नरक की जिंदगी जी रहे हैं इसीएल प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण : अनिता

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नरक की जिंदगी जी रहे हैं इसीएल प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण : अनिता

राजमहल कोल परियोजना के प्रभावित छोटा भोराय गांव के ग्रामीण नरक की जिंदगी जी रहे हैं. परियोजना प्रबंधन द्वारा ग्रामीणों की जमीन 2015 में अधिग्रहण किया गया था. जमीन के बदले में नौकरी रैयतों को दी गयी. लेकिन गांव का पुनर्वास नहीं किया गया. नौ वर्ष बीत जाने के बाद भी पुनर्वास नहीं होने पर ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए भाजपा नेत्री अनिता सोरन को अपना दर्द सुनाया. गांव का निरीक्षण करते हुए भाजपा नेत्री ने कहा कि ग्रामीण के साथ परियोजना प्रबंधन दोनीति कर रही है. गांव के बगल में कोयला खनन का कार्य किया जा रहा है तथा हैवी ब्लास्टिंग से ग्रामीण परेशान हैं. प्रबंधन किसी भी समय ब्लास्टिंग कर देता है तथा ब्लास्टिंग के दौरान मिट्टी व कोयले का टुकड़ा तेज रफ्तार से गांव में गिरता है. इससे जान माल का खतरा बना रहता है. ग्रामीण घर बनाने के लिए जमीन की मांग कर रहे हैं. लेकिन प्रबंधन जमीन नहीं दे रहा है, जिससे ग्रामीणों का पुनर्वास नहीं हो पा रहा है. कई ग्रामीणों को मुआवजा भी प्रबंधन द्वारा नहीं दिया गया है. 18 वर्ष से कम उम्र वाले व्यक्ति को घर बनाने का जमीन नहीं दिया जाना बिल्कुल गलत है. भाजपा नेत्री ने बताया कि प्रबंधन क्षेत्र में दोहरी नीति अपना रही है. कुछ दबंग व्यक्ति को सारी सुविधाएं दी जाती है. लेकिन गरीब ग्रामीण को प्रशासन का डर दिखाकर शोषण किया जा रहा है. भाजपा नेत्री ने गांव के बगल में हो रहे कोयला खनन कार्य को बंद करते हुए कहा कि गांव को पहले पुनर्वास किया जाए, उसके बाद खनन का कार्य किया जाये.

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