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Home झारखण्ड गोड्डा इंडी गठबंधन की जीत में झामुमो के आधार वोट बैंक की रही महत्वपूर्ण भूमिका

इंडी गठबंधन की जीत में झामुमो के आधार वोट बैंक की रही महत्वपूर्ण भूमिका

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इंडी गठबंधन की जीत में झामुमो के आधार वोट बैंक की रही महत्वपूर्ण भूमिका

जिले के तीन विधानसभा के साथ-साथ संताल परगना में इंडी गठबंधन में जहां भी कांग्रेस या फिर राजद के उम्मीदवार खड़े थे, उन सभी स्थानाें में गठबंधन के उम्मीदवारों को जिताने में झामुमो का तीरधनुष ही महत्वपूर्ण रहा. सभी ऐसे में खासकर राज्य के लिए सबसे हॉट सीट माना जाने वाला पोड़ैयाहाट से मझे हुए खिलाड़ी के रूप में प्रदीप यादव ने छठी बार किला फतह कर लिया है. इस बार श्री यादव कांग्रेस के टिकट से विधायक बने हैं, जबकि वर्ष 2009, 2014 व 2019 में लगातार तीन बार जेवीएम के टिकट से चुनाव लड़कर विजयी हुए. ऐसे यह सीट परंपरागत झामुमो की रही है. झामुमो के पॉकेट वोट की वजह से यहां तीर धनुष लेकर चुनाव मैदान में उतरने वाले किसी भी उम्मीदवार को बड़ा पैकेज वोट के तौर पर बैठे-बैठे वोट मिल जाता है. राजनीतिक विश्लेषक बताते है कि झामुमो के पॉकेट वोट की वजह से ही उम्मीदवार के हार-जीत का फैसला होता है. क्या है अब तक के चुनाव की स्थिति : विधानसभा चुनाव 2009 की ही बात की जाये, तो उस वक्त प्रदीप यादव भाजपा से निकलने के बाद पहली बार जेवीएम के टिकट से चुनाव लड़े थे. श्री यादव के विरोध में भाजपा के देवेंद्रनाथ सिंह एवं जेएमएम से अशोक कुमार चौधरी मैदान में थे. इस दौरान श्री यादव को कुल 64036 वोट मिले थे. वहीं देवेंद्रनाथ सिंह को 52878 वोट मिले. जबकि तीसरे स्थान पर रहे अशोक चौधरी को इस चुनाव में 44737 वोट मिला था. श्री सिह प्रदीप यादव से 11154 वोट के अंतर से पराजित हुए थे. उस बार झामुमो के श्री चौधरी को संताल आदिवासी के पॉकेट वोट के साथ मुसलमान का भी कुछ प्रतिशत वोट मिला था, जबकि वैश्य के भी वोट को पाने में सफल हुए थे. विस चुनाव 2019 में प्रदीप यादव का मुकाबला भाजपा के गजाधर सिंह के साथ था. इस बार श्री यादव को 77358 वोट और गजाधर सिंह को 63761 मत मिले थे. वहीं अशोक चौधरी को एक बार फिर से झामुमो ने उतारा था. श्री चौधरी को इस बार 34667 वोट मिले. भाजपा से जीत का फैसला इस बार 13557 मतों का रहा था. 2024 की बात की जाये तो महागठबंधन के उम्मीदवार श्री यादव कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में थे. उनका सीधा मुकाबला भाजपा के देवेंद्रनाथ सिंह से था. श्री यादव के दोनों बार के वोट के अंतर के साथ इस बार झामुमो के पॉकेट वोट को जोड़कर उन्हें 34130 वोट के अंतर से भाजपा के उम्मीदवार को शिकस्त दिया. वर्ष 2014 व 2019 के झामुमो के वोट को अगर मिला दिया जाये, तो उनके वोट के अंतर को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभायी है. इस बार श्री यादव ने 117842 वोट लाये, जबकि भाजपा के हिस्से 83712 वोट मिला है. श्री यादव के मतों के अंतर को बढ़ाने में झामुमो का वोट बड़ा ही काम आया. झामुमो नेता सह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ कल्पना सोरेन ने कुल तीन सभा किया, जिसमें पोड़ैयाहाट व सरैयाहाट प्रखंड में किया गया. 2000 में श्री यादव भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे. श्री यादव ने झामुमो नेता प्रशांत कुमार को हराया था. वहीं 2005 में भी श्री यादव ने भाजपा से चुनाव लड़कर दूसरी बार हराने का काम किया. बताते चलें कि बीच में उपचुनाव हुआ था, उस वक्त श्री यादव के भाई अजीत महात्मा भाजपा के टिकट से चुनाव लड़े थे. प्रशांत कुमार चुनाव लड़कर ढाई साल के लिए विधायक बने थे. श्री कुमार उस वक्त झामुमो में थे. लाेकसभा चुनाव में भाजपा को पोड़ैयाहाट से मिली थी बढ़त : 2024 के लोकसभा चुनाव में पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र से भाजपा को आठ हजार वोट की बढ़त मिली थी. मगर विधान सभा चुनाव में पीछे हो गयी. यही हाल 2019 के चुनाव का भी था. राजनीति पंडित की गणना इस बात को लेकर ज्यादा ही दिलचस्प है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा सांसद डॉ निशिकांत दुबे को इसी पोड़ैयाहाट से आठ हजार के मत की बढ़त थी. उन्हें पोड़ैयाहाट से ज्यादा सरैयाहाट से करीब 15 हजार बढ़त मिली थी. मगर इस बार महज तीन माह के अंतराल में हुए विधानसभा चुनाव में ही वोट की स्थिति गड़बड़ हो गयी.

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