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राष्ट्रीय लोक अदालत में 10981 मामलों का निबटारा

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राष्ट्रीय लोक अदालत में 10981 मामलों का निबटारा

आपसी सहमति से 2,21,97,061 रुपये का कराया गया समझौता कोर्ट प्रतिनिधि, गोड्डा झारखंड विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया. एक दिन में सुलहनीय मामलों के निष्पादन के लिए सात न्यायिक बेंचों ने कार्य किया और कुल 10981 वादों का निबटारा किया गया. लोक अदालत का वर्चुअल उद्घाटन झालसा के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन जस्टिस सुदिष्ट नारायण प्रसाद ने किया. इस दौरान पीडीजे सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार रमेश कुमार, सब जज सह सचिव दीपक कुमार, जज निरुपम कुमार तथा कार्यपालक पदाधिकारी अभय कुमार झा उपस्थित थे. लोक अदालत में कुल 10981 मामलों का निष्पादन करते हुए 2,21,97,061 रुपये की राशि पर समझौता कराया गया. सबसे अधिक 5724 मामले फ्रंट ऑफिस के तथा 1259 मामले नियोजन से संबंधित रहे. बैंक रिकवरी के 1059 मामलों में 70,07,820 रुपये की वसूली हुई. एमएसीटी के चार मामलों में 64,50,000 रुपये का समझौता हुआ. ट्रैफिक चालान के 841 मामलों में 30,68,301 रुपये की वसूली की गयी. क्रिमिनल कंपाउंडेबल के 1055 मामलों में 2,22,100 रुपये, स्थायी लोक अदालत के 43 मामलों में 4,37,941 रुपये, बिजली बिल के सात मामलों में 66 हजार रुपये तथा श्रम विवाद के तीन मामलों में 81,791 रुपये का समझौता हुआ. इसके अलावा मेट्रोमोनियल, उपभोक्ता, एक्साइज, सर्टिफिकेट, एफएफ, कोटपा एवं अन्य सिविल वादों का भी निबटारा किया गया. त्वरित निष्पादन के लिए सात न्यायिक बेंच गठित की गई थीं. पहली बेंच में पारिवारिक विवाद, मेट्रोमोनियल व सीआरपीसी 125 के मामले रखे गये. दूसरी बेंच में एमएसीटी, सिविल एवं श्रम विवाद, तीसरी में बिजली से संबंधित मामले, चौथी में एक्साइज, फॉरेस्ट एवं माप-तौल के मामले तथा पांचवीं बेंच में एसडीजेएम एवं जेएमएफसी कोर्ट के कंपाउंडेबल मामलों की सुनवाई हुई. छठी बेंच में बैंक रिकवरी, प्री-लिटिगेशन, राजस्व, म्यूटेशन एवं भूमि अधिग्रहण तथा सातवीं बेंच में उपभोक्ता वादों का निबटारा किया गया.

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